July 26, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

पश्चिम बंगाल चुनाव: कृषि, उद्योग और इतिहास का अनोखा मिश्रण हुगली, भाजपा और टीएमसी के बीच टक्कर



कोलकाता, 15 मार्च  हुगली पश्चिम बंगाल के बर्दवान संभाग में स्थित एक महत्वपूर्ण जिला है, जिसका मुख्यालय चिनसुराह में है। यह जिला हुगली नदी के नाम पर रखा गया है, जो यहां की जीवनरेखा है। नाम ‘हुगली’ संभवतः ‘होगला’ नामक लंबी सरकंडा घास से लिया गया है, जो नदी किनारों और दलदली क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उगती है।

इतिहास की दृष्टि से हुगली प्राचीन काल से महत्वपूर्ण रहा है। शुरुआती दौर में यह क्षेत्र ‘सुह्मास’ जनजाति के अधीन था, जिसका उल्लेख महाभारत में अंग, वंग और पुंड्र के साथ मिलता है और ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के व्याकरण ग्रंथ ‘महाभाष्य’ में भी। हजारों वर्षों की समृद्ध विरासत यहां मौजूद है, जिसमें भुरशुट बंगाली साम्राज्य का हिस्सा शामिल है। उपनिवेश काल से पहले हुगली एक प्रमुख नदी बंदरगाह था, जहां व्यापार फलता-फूलता था। 1536 में पुर्तगाली व्यापारियों को सुल्तान महमूद शाह से व्यापार की अनुमति मिली। 13वीं शताब्दी तक यह स्वदेशी शासकों के अधीन रहा, फिर मुगलों ने उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया। 1795 में बर्दवान जिले को विभाजित कर हुगली को अलग जिला बनाया। 1822 में यह अलग कलेक्टरेट बन गया।

हुगली जिले का क्षेत्रफल लगभग 3,149 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 55,19,145 थी, जिसमें पुरुष 28,14,653 और महिलाएं 27,04,492 थीं। जनसंख्या घनत्व 1,757 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। ग्रामीण जनसंख्या लगभग 61.43 प्रतिशत और शहरी 38.57 प्रतिशत थी। लिंगानुपात 961 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष था। अनुमानित रूप से 2026 तक जनसंख्या 60 लाख के करीब पहुंच चुकी है। जिले में चार उप-विभाग हैं: चिनसुराह सदर, श्रीरामपुर, चंदननगर और आरामबाग।

आर्थिक रूप से हुगली पश्चिम बंगाल के सबसे विकसित जिलों में शुमार है। यह राज्य का मुख्य जूट खेती, जूट उद्योग और जूट व्यापार केंद्र है। नदी तट पर स्थित होने से उद्योगों को परिवहन सुविधा मिलती है। कृषि प्रमुख है, जहां चावल, आलू, सब्जियां और अन्य फसलें उगाई जाती हैं। जूट मिलें, इंजीनियरिंग उद्योग और छोटे-मोटे कारखाने यहां केंद्रित हैं। कोलकाता के निकट होने से आर्थिक विकास तेज है।

राजनीतिक रूप से हुगली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 28) जिले का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें सात विधानसभाएं, बालागढ़, चंदननगर, चुंचुरा, धानेखाली, पांडुआ, सप्तग्राम और सिंगूर शामिल हैं। ये सभी विधानसभा क्षेत्र हुगली जिले में ही स्थित हैं।

अगर चुनावी इतिहास की बात करें तो हुगली लोकसभा का इतिहास विविध है। 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी की रचना बनर्जी ने जीत हासिल की, उन्हें 7,02,744 वोट मिले। भाजपा की लॉकेट चटर्जी को 6,25,891 वोट मिले, जबकि सीपीएम के मंदीप घोष को 1,39,919 वोट। जीत का अंतर करीब 76,853 वोटों का रहा।

1952 में कांग्रेस की लहर के बावजूद यहां एचएमएस के एनसी चटर्जी जीते। 1957-62 में सीपीआई के प्रोवत कार, 1967-77 में सीपीएम के बीके मोदक, 1980 में रूपचंद पाल, 1984 में कांग्रेस की इंदुमती भट्टाचार्य, फिर 1989-2004 तक सीपीएम के रूपचंद पाल लगातार जीते। 2009 में टीएमसी की डॉ रत्ना डे ने सीपीएम को हराया। 2014 में टीएमसी ने मजबूती दिखाई, लेकिन 2019 में भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने 6,71,448 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी की रत्ना डे दूसरे स्थान पर रहीं। 2024 में टीएमसी ने वापसी की।

यह जिला कृषि, उद्योग और इतिहास का अनोखा मिश्रण है। हुगली नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। आगामी विधानसभा चुनावों में यहां टीएमसी और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद है।

अन्य ख़बरें

आंध्र प्रदेश में कोरोना के 10 नए मामले, एक्टिव केस बढ़कर हुए 49; स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई

Newsdesk

डीआरआई की बड़ी कार्रवाई, देशभर में 27 किलो से अधिक तस्करी का विदेशी सोना जब्त, 12 आरोपी गिरफ्तार

Newsdesk

25 साल से ज्यादा समय से लंबित कर्मचारियों की शिकायतें सुलझाई गईं : मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading