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September 18, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा समाप्त करने मुख्यमंत्री के नाम विधायक विवेक विक्की पटेल को सौंपा ज्ञापन


*शिक्षक पात्रता परीक्षा उनके अनुभव का अपमान-विवेक पटेल*वारासिवनी*-शिक्षक समाज का आईना होता है।शिक्षक ही ऐसा गुरु है।जिनके बिना मनुष्य ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है।शिक्षकों के बिना छात्र कभी अपने मुकाम तक नहीं पहुंच सकता है।मगर अब इन्हीं शिक्षकों को सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा देने का आदेश जारी कर दिया है।अपनी प्रतिष्ठा एवं सम्मान को ध्यान में रखते हुए वारासिवनी-खैरलांजी क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या में शिक्षक वारासिवनी विधायक विवेक विक्की पटेल के जनसंपर्क कार्यालय पहुंचे।और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री रावउदय सिंह के नाम ज्ञापन विधायक विवेक विक्की पटेल को सौंपा,शिक्षकों की समस्याओं को गम्भीरता से देखते हुए विधायक विवेक पटेल ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और शिक्षा मंत्री को तत्काल पत्र लिखकर शिक्षक पात्रता परीक्षा समाप्त की मांग की है।शिक्षकों का कहना है कि यह परीक्षा उनके अनुभव का अपमान है और इससे मानसिक तनाव और नौकरी पर असुरक्षा महसूस हो रही है।

*शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं होती समाप्त तो हमें इच्छा मृत्यु अनुमति प्रदान करें – रोशनलाल नगपुरे*
       ब्लाक अध्यक्ष रोशनलाल नगपुरे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा करवाने जा रही है 2009 के पूर्व जितने शिक्षकों की नियुक्ति हुई है।उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा देना होगा।नहीं तो नौकरी समाप्त की जाएगी।हमारी मांग है कि 2009 के पूर्व जो नियुक्त शिक्षक है।उस समय की जो हमारी योग्यता थी। और जो मापदंड थे।उसको पूरा करके ही हम शासकीय सेवा में आए है।अब हमें पुनः परीक्षा देना का क्या मतलब है।ये हमारे मान सम्मान और प्रतिष्ठा का सवाल है।हम नहीं चाहते कि हमें पुनःपरीक्षा देनी पड़े।प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनः विचार दायर करे।बाकी राज्यों ने जैसा किया है,वैसा ही हमारी प्रदेश सरकार करे।हमारे शिक्षा विभाग में इस आदेश के बाद बहुत आक्रोश पनप रहा है।सुप्रीम कोर्ट से हमारा निवेदन है,कि अगर सरकार याचिका नहीं लगाती है,तो हम सभी शिक्षकों को इच्छा मृत्यु के लिए हमें अनुमति प्रदान करे।

*15-20 वर्षों की सेवा देने के बाद भी हमें 2018 की नियुक्त मान रही प्रदेश सरकार-प्रमोद पारधी*
            शिक्षक प्रमोद पारधी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश हुआ है कि 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता मुख्य रूप से देना होगा।वहीं एक तरफ सरकार हमें 2018 के शिक्षक मानती है।15-20 वर्षों की जो हमारी सेवा है,वह समाप्त कर दी गयी है।नियुक्ति दिनांक हमारा 2018 मान लिया गया है।जब हमें 2018 के नियुक्त शिक्षक मान लिया गया है।तो फिर 2009 के पहले के शिक्षको या उनकी परीक्षा होना है।जिस परिस्थिति में उस समय वेकेंसी निकली थी।शासन की जो भी व्यवस्था थी।जो हमे नियुक्त किया गया था।उस समय कोई ऐसी परिस्थिति नहीं थी।और अभी वर्तमान स्थिति में यह परीक्षा की बात लाकर हम शिक्षकों को विचलित कर दिया है।जो शिक्षक पेंशन की ओर जा रहा है।उससे शासन हमें भटका रही है।और ध्यान हमारा परीक्षा की ओर कर दिया गया है।जो शिक्षकों का अपमान है।

*प्रदेश सरकार कर रही हमारे गुरुओं का अपमान-विवेक पटेल*
         विधायक विवेक विक्की पटेल ने कहा कि हमारे कई शिक्षक लगभग 20-25 वर्षों से नौकरी कर रहे है।मगर सरकार का आदेश है कि सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा देना होगा।जबकि सभी पूरा मापदंड पूरा करके ही सभी शिक्षकों का चयन किया गया है।सरकार जो शिक्षकों से परीक्षा लेना चाहती है।ये हमारे गुरुओं का अपमान है।शिक्षक हमारा राष्ट्र निर्माता है।शिक्षकों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।मै प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री रावउदय सिंह को पत्र लिखकर शिक्षक पात्रता परीक्षा को समाप्त करने की मांग की है।

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