September 14, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सुनाई उम्रकैद की सजा

रायपुर, 6 अप्रैल । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित एनसीपी नेता रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 31 मई 2007 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य सह आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी मानते हुए उन्हें एक हजार रुपए का अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा दी। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया, तो छह माह अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान लागू होगा। वर्तमान में जमानत पर चल रहे अमित जोगी को अदालत ने निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करें। दरअसल इस मामले में सीबीआई ने अमित जोगी और याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य लोगों की मिलीभगत से एक बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था । 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।

इस फैसले को पीड़ित के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसने बाद में मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया था। कई वर्षों की कानूनी कार्यवाही के बाद उच्च न्यायालय ने अब अमित जोगी को दोषी पाया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी करने के निर्णय को पूर्णतः अवैध, गलत और साक्ष्यों के प्रतिकूल करार दिया। अदालत ने कहा कि जिस साक्ष्य के आधार पर अन्य आरोपियों को साजिश का दोषी ठहराया गया, वही साक्ष्य अमित जोगी के मामले में बिना ठोस कारण खारिज कर दिए गए।

हाईकोर्ट ने पाया कि पूरी साजिश के मास्टरमाइंड अमित जोगी थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र होने के कारण प्रभावशाली स्थिति में थे और पुलिस मशीनरी पर असर रखते थे। अदालत ने यह भी कहा कि इतनी बड़े स्तर की राजनीतिक साजिश, हमलावरों की व्यवस्था, भागने के रास्ते, फर्जी आरोपियों की प्लांटिंग और प्रारंभिक जांच भटकाने जैसा संगठित अपराध किसी बड़े नेतृत्व और संरक्षण के बिना संभव नहीं था। शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर अदालत ने कहा कि अब सीबीआई की अपील स्वीकार किए जाने के बाद अमित जोगी दोषी ठहराए जा चुके हैं, इसलिए सजा-वृद्धि संबंधी दूसरी याचिका निष्फल हो गई है।

अदालत ने रजिस्ट्ररी को निर्देश दिया कि यह निर्णय अमित जोगी को भेजा जाए और सुप्रीम कोर्ट में अपील का अधिकार भी बताया जाए। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई में पाया कि मई 2003 में रायपुर स्थित ग्रीन पार्क होटल, बत्रा हाउस और तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास में अमित जोगी समेत अन्य आरोपियों ने एनसीपी को कमजोर करने और रामावतार जग्गी को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी। आगामी चुनावों से पहले राज्य में इसके महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम होने की संभावना है। राम अवतार जग्गी के परिवार ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से प्रतीक्षित न्याय बताया। दोषी के लिए आगे के कानूनी विकल्प खुले हैं, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की संभावना भी शामिल है।

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