कोतमा।
विदेश की धरती पर रहकर भारतीय शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ाई करना आसान नहीं होता, लेकिन मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है इंडियन लैंग्वेज स्कूल, लागोस (नाइजीरिया) के छात्र गौरांग मिश्रा ने, जिन्होंने CBSE बोर्ड कक्षा 10वीं परीक्षा में 72 प्रतिशत अंक प्राप्त कर परिवार, समाज और भारत का नाम रोशन किया है।
गौरांग वर्तमान में इकरुडू, नाइजीरिया में निवास करते हैं, जबकि उनका परीक्षा केंद्र लागोस में था। परिवारजनों ने बताया कि विदेशों में भारतीय शिक्षा प्रणाली के अनुरूप अध्ययन करना कई कठिनाइयों से भरा होता है। भारत जैसे शैक्षणिक संसाधन, मार्गदर्शन और सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं, विशेष रूप से अफ्रीकी देशों में विद्यार्थियों को अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ता है।
गौरांग के पिता मनीष मिश्रा ने बताया कि उनके निवास स्थान से परीक्षा केंद्र लगभग 30 किलोमीटर दूर था। भारतीय समयानुसार परीक्षा व्यवस्था बनाए रखने के कारण उन्हें सुबह 5 बजे परीक्षा केंद्र पहुंचना पड़ता था, जिसके लिए रोजाना तड़के उठकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौरांग ने धैर्य और समर्पण के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी।
गौरांग के बड़े पापा भगवान दास मिश्रा, जो पत्रकार हैं, ने बताया कि गौरांग शुरू से ही मेधावी, अनुशासित और प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेलों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। गौरांग ने स्केटिंग में लगातार 4 वर्षों तक उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
गौरांग की इस सफलता से यह सिद्ध होता है कि यदि मन में लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो दूरी, संसाधनों की कमी और परिस्थितियों की चुनौतियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
उनकी सफलता पर माता-पिता मनीष मिश्रा एवं उपमा मिश्रा, दादा-दादी तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। परिवारजनों ने कहा कि गौरांग की यह उपलब्धि विदेश में रह रहे भारतीय परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह दिखाती है कि भारतीय प्रतिभा दुनिया के किसी भी कोने में अपना परचम लहरा सकती है।


