जबलपुर। जिले में गेहूं उपार्जन को लेकर प्रशासन ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने खरीदी केंद्रों से जुड़ी सभी समितियों और गोदामों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं, खासकर उन स्थानों पर जहां पिछले वर्षों में अमानक गुणवत्ता का गेहूं पाया गया था।
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपार्जन का कार्य सौंपने से पहले संबंधित समितियों और गोदामों की पूरी तरह जांच की जाए। यदि जांच के बाद भी उन्हें कार्य दिया जाता है, तो उन पर लगातार निगरानी रखी जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
प्रशासन ने उन समितियों की सूची भी साझा की है, जहां पहले गेहूं की गुणवत्ता खराब पाई गई थी या वजन में कमी के कारण उसे भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था।
नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक द्वारा कलेक्टर को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि पिछले तीन वर्षों में जिले की कुछ समितियों ने ऐसा गेहूं खरीदा, जिसमें बाहरी पदार्थ अधिक थे और गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा।
ऐसे मामलों में एफसीआई द्वारा गेहूं को रिजेक्ट कर दिया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
एफएक्यू मापदंड के अनुसार ही होगा उपार्जन
प्रबंध संचालक ने निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष उपार्जन कार्य केवल उन्हीं समितियों को दिया जाए, जो पूरी तरह सक्षम और भरोसेमंद हों। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि खरीदा गया गेहूं FAQ (Fair Average Quality) मापदंड के अनुसार ही हो।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित समिति और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस सख्ती का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य दिलाना और सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है।


