जनपद पंचायत अध्यक्ष आशु गुनाराम बघेले ने तथ्यो के साथलगाये आरोप
वारासिवनी…….राजनीति में नेताओ का झूठा श्रेय लेना और एक दूसरों को अपने से छोटा दिखाने का चलन आम बात हो गई है। बात भूमिपूजन समारोह,लोकार्पण समारोह सहित अन्य कार्यक्रमो की करे तो ऐसे वाक्यात अक्सर देखने सुनने को मिल ही जाते है। बात जब एक ही मंच पर पक्ष विपक्ष काबिज हो और सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा विपक्ष के किसी दूसरे जनप्रतिनिधि की उपेक्षा या नजरअंदाज कर दिया गया हो तो हर किसी को समझ में आता है कि यह सब सत्ता पक्ष द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाकर वर्चस्व के लिए किया जा रहा है। ऐसा बालाघाट में विधायक अनुभा मुंजारे के साथ कई बार हो भी चुका है। जिसका उनके द्वारा खुलकर विरोध भी किया गया।
श्रेय लेने की दिख रही है सनक…….
लेकिन बात जब विधायक जैसे संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी ही पार्टी की महिला जनपद पंचायत अध्यक्ष के साथ किया जाए तो इसे हल्की मानसिकता या पूर्वाग्रह से ग्रसित और श्रेय लेने की सनक से ज्यादा कुछ नही कहा जा सकता। ऐसे में यह लोग संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की कितनी भी वकालत क्यों न कर ले जब तक पार्टी में ऐसी सोच वाले विधायक या नेता रहेंगे महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए हमेशा संघर्ष ही करना पड़ेगा। ऐसे नेता हमेशा महिला नेताओं की राह में रोड़ा कब बन जाए कहा नही जा सकता।
यह है आरोप
जनपद पंचायत खैरलांजी की अध्यक्ष आशु गुनाराम बघेले का आरोप है कि इसके पूर्व भी विधायक विवेक पटेल कई बार निर्माण कार्य के भूमिपूजन और लोकार्पण समारोहों में प्रोटोकोल का पालन न कर हल्की मानसिकता का परिचय दे चुके है। लेकिन वह हर बार चुप रही। जबकि प्रोटोकॉल के तहत यह सब गलत है। क्योंकि कई बार विधायक स्वयं ऐसे आरोप सत्ता पक्ष और प्रशासन पर लगा चुके है। जहाँ उनके प्रोटोकॉल का ध्यान नही रखा गया था। जो विधायक स्वयं चाहते है कि किसी भी शासकीय कार्यक्रमों में उनको प्रोटोकॉल के तहत मान सम्मान मिले। ऐसे विधायक यदि खुद ही प्रोटोकॉल का पालन नही करे और दूसरी महिला जनप्रतिनिधि का अपमान करे तो फिर उनकी सोच और मंशा पर सवाल उठना लाजमी है।
कार्यो की स्वीक्रति के लिये मप्र शासन का आभार…..
जप अध्यक्ष खैरलांजी के अनुसार हम एक ही पार्टी में होने के कारण मैंने इन बातों को हमेशा नजरअंदाज किया। लेकिन इस बार जब बात निर्माण कार्य के श्रेय लेने और उनके अधिकारों के हनन की सामने आयी तो मुझे विरोध करने सामने आना पड़ा। जिस निर्माण कार्य के स्वीकृति में विधायक द्वारा शायद कोई प्रयास नही किया गया हो उस कार्य को खुद की उपलब्धी बताना ठीक नही है। वर्ष 2024 में उनके द्वारा ग्राम पंचायत कन्हरगांव अंतर्गत ग्राम चीचोली के चन्दन नदी पर रिटर्ननिंग वॉल सहित अन्य ग्रामों में निर्माण कार्य खनिज मद से स्वीकृति के लिए कलेक्टर से मांग की गई थी। जिसका पत्र भी उनके पास है। जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जनपद पंचायत का प्रस्ताव माँगा गया था। जिसके बाद हमने प्रस्ताव भी उनको दिया था। हो सकता है विधायक ने भी इसके लिए प्रयास किए हो लेकिन वह अकेले इसका श्रेय ले यह ठीक नही है। निमंत्रण कार्ड में जनपद पंचायत अध्यक्ष का नाम नही छापकर विधायक हल्की मानसिकता का परिचय दे रहे है। जिसका वह विरोध करती है और भविष्य में भी करती रहेंगी। ऐसे में यह बात किसी के गले नही उतर रही है कि आखिर विधायक ऐसी हल्की सोच क्यों दिखा रहे है। वह अपनी लकीर लंबी करने के बजाय उसे छोटी क्यों कर रहे है। क्या जनपद पंचायत अध्यक्ष की अहमियत उनके नजर में कुछ भी नही है। या बात कुछ और है यह तो भविष्य में ही पता चल पाएगा।
क्या है मामला
ज्ञात हो कि 22 अपै्रल 2026 को ग्राम चिचोली में रिटर्ननिंग वॉल,सीसी रोड सहित कोथूरना से पिपरिया प्रधान मंत्री सड़क मार्ग पर पुलिया का भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसे अपरिहार्य कारणों से बाद में स्थगित करवा दिया गया था। इस कार्यक्रम के निमंत्रण कार्ड में मुख्य अतिथि सांसद भारती पारधी को बनाया गया था। वहीं प्रमुख अतिथि विवेक विक्की पटेल और अध्यक्षता तेजराज नगपूरे ब्लॉक काँग्रेस अध्यक्ष को बनाया गया था। वहीं विशेष अतिथियों के रूप में पुर्व और वर्तमान आठ जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण कार्ड में शामिल किया गया था। लेकिन जनपद पंचायत अध्यक्ष का नाम उक्त निमंत्रण कार्ड से गायब था। दूसरी ओर जप अध्यक्ष खैरलांजी ने इन कार्यो की स्वीक्रति से लेकर निर्माण करने की प्रक्रिया के लिये मप्र शासन का विशेष रूप से आभार भी व्यक्त किया है।


