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April 27, 2026
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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर हस्ताक्षर से पहले पीएम लक्सन बोले- जो दशकों से नहीं हुआ वह आज होगा

नई दिल्ली, 27 अप्रैल । भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सोमवार को मुहर लगने वाली है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए डील को लेकर दशकों से लोगों ने कहा कि यह नहीं होगा, लेकिन आज यह होने वाला है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एक साल से थोड़ा ज्यादा समय पहले, मैं भारत में प्रधानमंत्री मोदी से मिला था। तब हम इस बात पर सहमत हुए थे कि हम एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे।

दशकों तक, कई लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन आज रात, उस डील पर साइन होने वाले हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता है जो न्यूजीलैंड एक्सपोर्टर्स को 1.4 बिलियन लोगों तक पहले कभी नहीं हुई पहुंच देता है और एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनाता है जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाली है। इसका मतलब है खेतों और बगीचों में ज्यादा नौकरियां, इसका मतलब है स्थानीय समुदाय में ज्यादा पैसा आना और इसका मतलब है आपके परिवार के लिए आगे बढ़ने के ज्यादा मौके।” इस समझौते पर भारत मंडपम में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उनके समकक्ष टॉड मैक्ले की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया जाएगा।

यह दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इस समझौते का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है और इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव सहित वैश्विक अनिश्चितताएं व्यापार प्रवाह को प्रभावित कर रही हैं। यह समझौता विनिर्माण, अवसंरचना, सेवाओं, नवाचार और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में अनुमानित 20 अरब डॉलर के निवेश के लिए भी रास्ते खोलेगा।

इस समझौते के तहत, भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजारों में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा। वहीं न्यूजीलैंड से भारत को आयात होने वाले अपने लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट या कमी देखने को मिलेगी। इन उत्पादों में ऊन, कोयला, लकड़ी, शराब, समुद्री भोजन, चेरी, एवोकाडो और ब्लूबेरी शामिल हैं। हालांकि, भारत ने घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा के लिए डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शुल्क छूट के दायरे से बाहर रखा है। न्यूजीलैंड को कीवी फल और सेब जैसे प्रमुख निर्यातों पर कोटा-आधारित शुल्क में कमी भी मिलेगी। साथ ही, उसे भेड़ के मांस, ऊन और वानिकी उत्पादों सहित कई वस्तुओं पर शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जबकि मनुका शहद, बेबी फूड्स और कुछ समुद्री भोजन पर शुल्क में कमी का लाभ भी मिलेगा।

समझौते की एक प्रमुख विशेषता पेशेवरों के लिए सुगम आवागमन है। न्यूजीलैंड ने प्रतिवर्ष 5,000 भारतीय पेशेवरों के लिए अस्थायी रोजगार वीजा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जिससे उन्हें तीन साल तक रहने की अनुमति मिलेगी। इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण सहित कई तरह के व्यवसाय शामिल होंगे, साथ ही योग प्रशिक्षक, आयुष चिकित्सक, रसोइया और संगीत शिक्षक जैसे पारंपरिक पेशे भी शामिल होंगे।

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