घेराव
अनूपपुर, । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित भोलगढ़ गांव में रविवार की दोपहर एक दर्दनाक हादसे में ग्रामीण महिला प्रेमवती पाव की हाथी के हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब पुलिस अभिरक्षा में एंबुलेंस से शव गांव लाया गया, तब परिजनों और ग्रामीणों ने शव लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, हाथियों को गांव से बाहर निकालने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर प्रेमवती पाव गांव के पास अपने दैनिक कार्य में लगी थीं, तभी अचानक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा, लेकिन ग्रामीणों में भारी नाराजगी बनी रही। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस एंबुलेंस से शव को गांव लेकर पहुंची, लेकिन परिजनों ने शव को वाहन से उतारने तक से मना कर दिया। उनका कहना था कि जब तक प्रशासन हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं करेगा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
घटना की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण भोलगढ़ मढ़िया प्रांगण में एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग घेराव की चेतावनी देते हुए वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके पर बुलाने की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। ग्रामीणों ने कहा कि गांव के आसपास लगातार हाथियों की मौजूदगी से लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। हाथियों को गांव से बाहर निकाला जाए या उनका रेस्क्यू किया जाए। पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए और जब तक हाथियों को हटाया नहीं जाता, तब तक अतिरिक्त वन कर्मियों की तैनाती की जाए।
रमेश सिंह ने राजस्व विभाग से यह भी जानकारी मांगी कि अब तक हाथियों से हुए नुकसान के मामलों में कितना मुआवजा दिया गया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर हाथियों का रेस्क्यू नहीं किया गया, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा नहीं मिला और दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण वन विभाग कार्यालय का घेराव करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु डीएफओ और एसडीओ वन अनूपपुर प्रीतेश पखाले मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि हाथियों को जल्द गांव से दूर करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शासन की ओर से पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पंचायत स्तर पर अतिरिक्त सहायता, घायल व्यक्ति के बेहतर इलाज और तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिलाया गया।
वन विभाग और प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ। परिजनों ने शव को स्वीकार किया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद वन विभाग और कोतवाली पुलिस ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। खेत, फसल और ग्रामीणों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।


