?
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो से सवाल किया है कि जांच में अपात्र पाए गए सैकड़ों कॉलेजों के खिलाफ अब तक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश दिए कि वह प्रदेश के सभी लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों का अभिलेख प्रस्तुत करे। साथ ही यह स्पष्ट करे कि जांच में करीब 600 कॉलेज अपात्र पाए जाने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन और शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने भारतीय नर्सिंग परिषद और मध्य प्रदेश नर्सिंग परिषद से भी जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि अपात्र और मानकविहीन कॉलेजों को मान्यता देने में किन अधिकारियों की भूमिका रही और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। संबंधित अधिकारियों की सूची भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह सुनवाई विधि छात्र संघ के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर जनहित याचिका पर हो रही है। न्यायालय ने सभी संबंधित पक्षों को 12 मई तक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को यह भी निर्देशित किया है कि वह जांच में सामने आए व्यक्तियों और संस्थानों की संलिप्तता स्पष्ट करे तथा दोषियों के विरुद्ध अब तक की गई दंडात्मक कार्रवाई की पूरी जानकारी प्रस्तुत करे। मामले की अगली सुनवाई में न्यायालय इस प्रकरण की प्रगति की समीक्षा करेगा।


