मंगलवार सुबह 10.30 बजे जबलपुर हाईकोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश
अनूपपुर,। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने आदेशों की अवहेलना और नियमितीकरण के बाद देय लाभों का भुगतान लंबित रखने के मामले में अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली समेत चार अधिकारियों को तलब किया है। न्यायालय ने कलेक्टर, संभागीय उपायुक्त आदिवासी विकास शहडोल, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अनूपपुर सरिता नायक तथा कन्या परिसर अनूपपुर की प्राचार्य प्रमिला पांडे को मंगलवार 28 अप्रैल को सुबह 10.30 बजे कोर्ट रूम नंबर 13 में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
मामला कन्या परिसर अनूपपुर में पदस्थ सहायक ग्रंथपाल संतोष कुमार शुक्ला से जुड़ा है। शुक्ला के नियमितीकरण के बाद उन्हें मिलने वाले एरियर्स, समयमान वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभ लंबे समय से लंबित थे। आरोप है कि पहली किश्त जारी होने के बाद विभाग ने उच्च न्यायालय और शासन के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करते हुए रिकवरी आदेश जारी कर दिया और अन्य सभी लाभ रोक दिए। उच्च न्यायालय जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद्र घिल्डियाल ने बताया कि शासन और न्यायालय के आदेश के बावजूद विभाग ने जानबूझकर भुगतान रोके रखा। कोष एवं लेखा संभागीय संयुक्त संचालक रीवा द्वारा 1 मई 2025 को आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, वहीं जिला कोषालय ने 30 मई 2025 को सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय को पत्र भेजकर लंबित भुगतान के लिए आवश्यक जानकारी मांगी थी, लेकिन यह पत्र कार्यालय में ही दबा रहा और न तो रीवा भेजा गया, न ही अनूपपुर कोषालय को जानकारी दी गई।
इसी बीच सहायक आयुक्त आदिवासी विकास अनूपपुर द्वारा 23 जनवरी 2025 को संतोष कुमार शुक्ला के विरुद्ध रिकवरी आदेश जारी कर 15 दिनों में राशि जमा करने के निर्देश दे दिए गए, जबकि उनके बकाया भुगतान अब भी लंबित थे। विभागीय लापरवाही और दमनात्मक कार्रवाई से परेशान होकर शुक्ला ने जबलपुर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
याचिका में कलेक्टर हर्षल पंचोली, संभागीय उपायुक्त आदिवासी विकास शहडोल, सहायक आयुक्त सरिता नायक और प्राचार्य प्रमिला पांडे को प्रतिवादी बनाया गया। न्यायालय ने 10 मार्च 2025 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक पालन नहीं होने पर 16 अप्रैल 2026 को एक सप्ताह के भीतर आदेशानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
24 अप्रैल 2026 को प्रतिवादियों के अधिवक्ता के अनुरोध पर मामला पुनः 27 अप्रैल को सूचीबद्ध हुआ। सुनवाई के दौरान प्राचार्य कन्या परिसर अनूपपुर न्यायालय में उपस्थित रहीं। दो वर्षों से भुगतान लंबित रहने और आदेशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने अब सभी चारों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।


