बिजली कर्मियों से मारपीट के पीछे निकली बड़ी सच्चाई, 25 परिवारों को एक कनेक्शन से सप्लाई
जबलपुर। विजय नगर क्षेत्र में बिजली कर्मचारियों के साथ हुई मारपीट का मामला अब गंभीर मोड़ ले चुका है। शुरुआत में इसे अघोषित बिजली कटौती के विरोध से जुड़ा बताया जा रहा था, लेकिन जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर ही बदल दी है। अब साफ हो रहा है कि हंगामा करने वाले कुछ लोगों के घरों में लंबे समय से बिजली चोरी का खेल चल रहा था।
दरअसल, 1 मई को माढ़ोताल-उखरी इलाके में बड़ी संख्या में लोगों ने बिजली विभाग की टीम पर हमला कर दिया था। करीब 50 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि तीन कर्मचारियों—दीपक सोनी, धमेन्द्र पटेल और राहुल वर्मा—के साथ मारपीट भी की। इस घटना के बाद मामला थाने तक पहुंचा और घायल कर्मचारियों को विभाग की ओर से आर्थिक सहायता दी गई।
घटना के बाद जब विभागीय टीम आरोपियों के घरों की जांच के लिए पहुंची, तो स्थिति चौंकाने वाली निकली। अधिकारियों को पता चला कि कुछ घरों में अवैध तरीके से बिजली का उपयोग किया जा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि एक ही बिजली कनेक्शन से लगभग 25 परिवारों को सप्लाई दी जा रही थी, और कुल बिल मात्र 250 रुपये आ रहा था। इससे साफ संकेत मिलता है कि बड़े स्तर पर बिजली चोरी की जा रही थी।
4 मई को चलाए गए सघन जांच अभियान के दौरान जब बकाया बिल और अनियमितताओं के चलते कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू की गई, तो फिर से विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि कुछ लोगों ने सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की और माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोपियों के एक रिश्तेदार, जो खुद को वकील बता रहे थे, मौके पर पहुंचकर कार्रवाई रोकने की कोशिश करने लगे। उन्होंने कथित तौर पर खुद पर मिट्टी तेल डालकर आत्मदाह की धमकी भी दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कार्रवाई प्रभावित हुई।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिजली चोरी के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, इस घटना के बाद बिजली कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है और उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
यह मामला अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें बिजली चोरी, कानून-व्यवस्था और सरकारी कार्य में बाधा जैसे गंभीर पहलू जुड़ गए हैं। ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि दोषियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाती है।


