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May 14, 2026
सी टाइम्स
हेल्थ एंड साइंस

का आहार ही बच्चे की ताकत, अपनी डाइट में जरूर शामिल करें ये पौष्टिक चीजें

मां

नई दिल्ली, 6 मई ( स्तनपान कराने वाली महिलाओं का खान-पान सिर्फ उसकी सेहत तक सीमित नहीं रहता बल्कि सीधे बच्चे के विकास और उसकी इम्यूनिटी पर भी असर डालता है। इसलिए इस समय डाइट का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है। सही और संतुलित भोजन न सिर्फ मां को ताकत देता है बल्कि बच्चे को भी जरूरी पोषण देता है जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास अच्छे से हो पाता है। 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने भोजन में सभी जरूरी पोषक तत्व शामिल करें। आमतौर पर भोजन को चार मुख्य समूहों में बांटा जा सकता है। पहला समूह है अनाज जिसमें गेहूं, चावल, बाजरा और रागी जैसे विकल्प शामिल होते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देते हैं और दिनभर एक्टिव रहने में मदद करते हैं। दूसरा समूह है दालें और प्रोटीन युक्त चीजें जैसे मूंग, मसूर, चना आदि। ये शरीर की मरम्मत और बच्चे के विकास में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।

तीसरा समूह है फल और सब्जियां। ये विटामिन, मिनरल और फाइबर का अच्छा स्रोत होती हैं। हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी, बथुआ और मौसमी फल जैसे केला, सेब, पपीता आदि मां के शरीर को मजबूत बनाते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। चौथा समूह है दूध और दूध से बने पदार्थ, जैसे दही, पनीर और छाछ। ये कैल्शियम का अच्छा स्रोत होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा, थोड़ी मात्रा में अच्छे फैट्स भी जरूरी होते हैं, जैसे घी, मेवे (बादाम, अखरोट), गुड़, तिल आदि। ये शरीर को ऊर्जा देते हैं और कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं। हालांकि ध्यान रहे कि इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। ज्यादा खाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आमतौर पर सामान्य से थोड़ा ज्यादा भोजन करने की सलाह दी जाती है, लगभग एक चौथाई ज्यादा। इसका कारण यह है कि इस समय शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है क्योंकि दूध बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। अगर सही मात्रा में खाना नहीं लिया जाएगा तो थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।

सिर्फ खाना ही नहीं बल्कि पानी का सेवन भी बहुत जरूरी है। दिनभर में पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और दूध बनने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है। इसके अलावा हल्की-फुल्की वॉक और आराम भी जरूरी है, ताकि शरीर को रिकवरी का समय मिल सके।

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