जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (सीडीवी) की चपेट में आने से एक बाघिन और उसके शावक की मौत हो गई। यह घटना सरही वन परिक्षेत्र की बताई जा रही है, जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
मृत बाघिन की पहचान टी-141 के रूप में हुई है। दोनों के सैंपल जांच के लिए जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ भेजे गए थे, जहां रिपोर्ट में इस घातक वायरस की पुष्टि हुई। यह वायरस आमतौर पर कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन अब यह जंगली जीवों, खासकर बाघों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना सामने आने के बाद वन विभाग ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी है। जिस क्षेत्र में बाघिन और शावक के शव मिले थे, वहां विशेष रूप से सैनिटाइजेशन कराया गया है। इसके अलावा मुक्की स्थित क्वारंटाइन और ट्रीटमेंट सेंटर, ट्रांसपोर्ट पिंजरों और उपयोग में आए वाहनों को भी निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पूरी तरह से साफ किया गया है।
वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों के टीकाकरण का अभियान तेज कर दिया गया है। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि वे किसी भी असामान्य स्थिति में वन विभाग को तुरंत सूचना दे सकें।
पार्क प्रबंधन ने बाघों की निगरानी भी बढ़ा दी है। बाघों के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में करीब 40 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और गश्ती दल की संख्या भी बढ़ाई गई है। वन अमले को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई वन्यजीव असामान्य व्यवहार करता दिखाई दे, तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को सूचना दी जाए।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस वायरस की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है और पूरे मामले की मॉनिटरिंग भोपाल मुख्यालय से की जा रही है। फिलहाल प्रशासन का फोकस वायरस के फैलाव को रोकने और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।


