30.2 C
Jabalpur
May 14, 2026
सी टाइम्स
बॉलीवुडमनोरंजन

आर्ट सिनेमा को नया आयाम देने वाले वनराज भाटिया, जो श्याम बेनेगल के रहे पसंदीदा संगीतकार



मुंबई, 6 मईभारतीय समानांतर सिनेमा में ऐसे कई कलाकार हुए जो भले ही आज इस दुनिया में न हों मगर उनकी कला आज भी उतनी नई और प्रशंसकों के बीच खास है, जितनी पुराने दौर में थी। ऐसे ही एक संगीतकार हुए वनराज भाटिया, जो न केवल श्याम बेनेगल के पसंदीदा संगीतकार थे बल्कि उन्होंने आर्ट सिनेमा को एक नया आयाम दिया। 

महान संगीतकार वनराज भाटिया की 7 मई को पुण्यतिथि है। श्याम बेनेगल जैसे मशहूर निर्देशक के पसंदीदा संगीतकार रहे भाटिया की संगीत जगत में ‘भूमिका’ कमाल की रही। उनका लाजवाब संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसता है। उन्होंने परंपरागत और आधुनिक संगीत को खूबसूरती से जोड़कर एक अलग पहचान बनाई।

वनराज भाटिया का जन्म 31 मई 1927 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग ली थी, लेकिन हिंदी सिनेमा में उन्होंने अपनी मौलिक शैली से खास जगह बनाई। उनकी पहली फिल्म 1974 में आई श्याम बेनेगल की ‘अंकुर’ थी। इसके बाद दोनों की जोड़ी लंबे समय तक साथ चली। श्याम बेनेगल की फिल्मों ‘मंथन’, ‘निशांत’, ‘भूमिका’, ‘कलयुग’, ‘जुनून’, ‘मंडी’ और ‘त्रिकाल’ में वनराज भाटिया का संगीत यादगार रहा। ‘भूमिका’ फिल्म का गाना “तुम्हारे बिना जी न लगे घर में” आज भी लोगों की जुबान पर है।

उन्होंने बेनेगल की फिल्मों में लीक से हटकर संगीत दिया, जो फिल्म की कहानी और माहौल के साथ पूरी तरह घुलमिल जाता था। गोविंद निहलानी की ‘तमस’ के लिए उन्होंने जो संगीत तैयार किया, उसके लिए उन्हें 1988 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह फिल्म भीष्म साहनी के उपन्यास पर आधारित थी और भाटिया के संगीत ने इसे और गहराई दी।

वनराज भाटिया ने कुल 73 फिल्मों के लिए संगीत दिया। उनकी फिल्मों में ‘खामोश’, ‘मोहन जोशी हाजिर हो’, ‘अघात’, ‘परदेस’, ‘दामिनी’ और ‘अजूबा’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने बैकग्राउंड स्कोर के क्षेत्र में भी शानदार काम किया और प्रीति सागर जैसी गायिका को फिल्म संगीत में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘जूली’ फिल्म का गाना ‘माई हार्ट इज बिटिंग’ प्रीति सागर की आवाज में बेहद लोकप्रिय हुआ। भाटिया की फिल्मों में प्रीति सागर अक्सर गाते हुए दिखाई दीं।

संगीत के अलावा उन्होंने हजारों विज्ञापनों के जिंगल्स बनाए। ‘भारत एक खोज’ और ‘तमस’ जैसे टीवी सीरियल्स के लिए भी उनका संगीत सराहा गया। उन्होंने आध्यात्मिक एल्बम भी जारी किए, जैसे ‘इंडियन मेडिटेशन म्यूजिक’, ‘भगवद गीता’ और ‘उपनिषद’ पर आधारित कार्य।

साल 2012 में उन्हें पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया। साल 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला था। 55 वर्षों के करियर में उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल, हिंदी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और आध्यात्मिक संगीत के साथ ही विज्ञापनों में भी अपनी खास छाप छोड़ी। 7 मई 2021 को वह काला दिन आया, जब 93 वर्ष की आयु में वनराज भाटिया इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए। उनके जीवन का अंतिम दौर काफी दर्द और आर्थिक विपन्नता में बिता।

अन्य ख़बरें

‘विमल खन्ना’ को लेकर सनी हिंदुजा ने कहा, ‘इतने लोकप्रिय किरदार को निभाना बड़ी जिम्मेदारी

Newsdesk

नीरज पाठक के निर्देशन के प्रशंसक हुए फ्रेडी दारूवाला, बोले- ‘पिछले सीजन से ज्यादा इंटेंस होगी कहानी

Newsdesk

वत्सल-इशिता ने एयरपोर्ट पर 20 रुपए में खरीदी पानी की बोतल, बोले- ‘सरकार ने किया कमाल का काम

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading