जबलपुर। मध्यप्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल के हालिया जबलपुर दौरे को लेकर कांग्रेस के भीतर ही असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और नेता सोशल मीडिया पर कार्यक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे एक गुट विशेष तक सीमित बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से संवाद के उद्देश्य से अजय सिंह राहुल शहर पहुंचे थे, लेकिन उनके कार्यक्रमों को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ नेताओं का आरोप है कि दौरे के दौरान उन्हीं लोगों को प्राथमिकता दी गई, जिनका संगठन में विशेष प्रभाव नहीं है, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया।
सोशल मीडिया पर कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों ने खुलकर लिखा कि कार्यक्रमों में एक गुट विशेष का दबदबा दिखाई दिया। वहीं पार्टी के अंदरूनी जानकारों का कहना है कि कुछ नेता स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और इसी कारण सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को जबलपुर कांग्रेस की पुरानी गुटीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि शहर और जिला संगठन की नई नियुक्तियों के बाद भी पार्टी के भीतर पूरी तरह एकजुटता नहीं बन पाई है।
नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने अपने कार्यालय में अजय सिंह राहुल का कार्यक्रम आयोजित कर कार्यकर्ताओं से संवाद कराया। इस दौरान कार्यकर्ताओं का परिचय भी कराया गया, लेकिन इसके बावजूद संगठन के भीतर असंतोष कम होता नजर नहीं आया।
अजय सिंह राहुल ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि वे नई कांग्रेस को समझने और समर्पित कार्यकर्ताओं से मिलने जबलपुर आए हैं। हालांकि उनके दौरे के बाद जिस तरह सोशल मीडिया पर कांग्रेसियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं, उससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
अब सवाल उठने लगा है कि आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस संगठन अपने भीतर की गुटबाजी को खत्म कर एकजुटता दिखा पाएगा या नहीं।


