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जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जबलपुर में रविवार को आयोजित “उल्लास 2026” सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित संजीव सचदेवा ने कहा कि “बच्चों की प्रतिभा ही देश की प्रगति निश्चित करती है। एक विकसित और विकासशील देश की यह महत्वपूर्ण आवश्यकता है कि उसकी आने वाली पीढ़ी प्रतिभावान हो। इस प्रकार के आयोजन बच्चों को मंच प्रदान करते हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर अन्य बच्चों को भी प्रेरित करते हैं।”
मुख्य न्यायाधिपति श्री सचदेवा ने कहा कि बच्चों में छिपी रचनात्मक क्षमता को पहचानना और उसे सही दिशा देना समाज तथा संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाती हैं तथा उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करती हैं।
कार्यक्रम में विवेक रूसिया, आनंद पाठक एवं विशाल धगट विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर खंडपीठ में वर्ष 2024 और 2025 में “उल्लास” कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद मुख्य पीठ जबलपुर में पहली बार इस सांस्कृतिक आयोजन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति तथा उच्च न्यायालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन में बच्चों के लिए तीन आयु वर्ग — 8 वर्ष तक, 9 से 14 वर्ष तथा 15 से 18 वर्ष तक — निर्धारित किए गए थे। इनमें फैंसी ड्रेस, ड्रॉइंग, निबंध लेखन और रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसके अलावा प्रतिभावान बच्चों और अभिभावकों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने कहा कि “उल्लास” जैसे आयोजन बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं।
वहीं न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को पहचान देने और उन्हें आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में सकारात्मक सोच, सामाजिक सहभागिता और आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों एवं विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह, विनय सराफ, दीपक खोत, रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन, बी.पी. शर्मा सहित अनेक न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा धरमिन्दर सिंह, कृष्णमूर्ति मिश्र, उमेश पांडव तथा सुमन श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।


