14 मई को कलेक्ट्रेट कार्यालय सभाकक्ष में महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े कानूनों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला कलेक्टर श्री मृणाल मीना एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास विभाग) दीपमाला मंगोदिया के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सतीश शर्मा ने की। इस अवसर पर प्रथम श्रेणी न्यायाधीश निहारिका व्यास तथा जिला विधिक सहायता अधिकारी जितेन्द्र मोहन धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013, गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
न्यायाधीशों ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 के अंतर्गत यौन उत्पीड़न की परिभाषा, 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक परिवाद समिति (ICC) के गठन, स्थानीय शिकायत समिति (LCC) की भूमिका एवं शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही POCSO अधिनियम के तहत बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, अपराध की रिपोर्टिंग तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी साझा की गई।
कार्यशाला में PCPNDT अधिनियम के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध, कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम तथा कानून उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधानों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
वन स्टॉप सेंटर प्रशासक बालाघाट सुश्री रचना चौधरी ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से She Box Portal की जानकारी दी। उन्होंने पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया एवं निजी तथा गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा गठित समितियों के पंजीकरण की विधि समझाई। कार्यशाला में शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी, बैंक प्रतिनिधि तथा विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी संस्थानों से अपने कार्यालयों में आंतरिक परिवाद समिति गठित कर उसकी जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया।


