वॉशिंगटन, 15 जून । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते के बाद होर्मुज की खाड़ी ‘हमेशा के लिए टोल-फ्री’ हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक को सुरक्षित करेगा और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक खास इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यह समझौता इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को खुला रखने में मदद करेगा और साथ ही क्षेत्र में बड़े युद्ध के खतरे को भी कम करेगा। अखबार के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि इस समझौते से होर्मुज की खाड़ी ‘हमेशा के लिए टोल-फ्री’ रहेगी और उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने इजरायल को परमाणु विनाश से बचा लिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोलने की उम्मीद रखता है, जो दुनिया के तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत जरूरी समुद्री रास्ता है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ अंतिम परमाणु समझौते तक नहीं पहुंचता तो वह तेहरान पर फिर से सैन्य हमले शुरू कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस इंटरव्यू में ईरान पर पहले किए गए सैन्य हमलों के अपने फैसले का भी बचाव किया। अखबार के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि इन हमलों और उसके बाद लगे नौसैनिक अवरोध ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अमेरिका के पक्ष में कर दिया है, और इसी से यह समझौता संभव हो पाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी तारीफ की और कहा कि उनकी भूमिका ने कूटनीतिक प्रक्रिया में मदद की है। साथ ही उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना करते हुए उन्हें ‘बहुत मुश्किल व्यक्ति’ कहा और यह भी कहा कि इजरायली सैन्य कार्रवाइयों ने लगभग इस समझौते को बिगाड़ दिया था। इसके बावजूद अभी कई अहम सवाल अनसुलझे हैं। समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी जारी नहीं किया गया है और आगे की बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, दोनों पक्षों ने कुछ सबसे मुश्किल मुद्दों को बाद की बातचीत के लिए टाल दिया है। यह प्रस्तावित समझौता फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी चर्चा का बड़ा विषय बनने की उम्मीद है।


