स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत“अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस” पर कार्यक्रम आयोजित
जबलपुर। स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना, एवं के संयुक्त तत्वावधान में “अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस” के अवसर पर विद्यार्थियों हेतु “महाकौशल की ऐतिहासिक विरासत और संग्रहालयीय महत्व” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य ने विद्यार्थियों को महाकौशल अंचल की समृद्ध पुरातात्त्विक, सांस्कृतिक एवं संग्रहालयीय धरोहरों से परिचित कराते हुए कहा कि महाकौशल क्षेत्र केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के प्राचीन विकास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी के हथनौरा क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन मानव अवशेष ‘नर्मदाकेसिस’ मानव विकास क्रम की अमूल्य धरोहर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि रूपनाथ का अशोक शिलालेख, तेवर एवं ककरेहटा के पुरातात्त्विक उत्खनन, बिलहरी एवं नरसिंहपुर के कलचुरीकालीन अवशेष, तिगवा का गुप्तकालीन विष्णु मंदिर तथा राम वन गमन पथ से जुड़े सांस्कृतिक साक्ष्य इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को प्रमाणित करते हैं। संग्रहालय किसी भी देश की सभ्यता, संस्कृति, कला और इतिहास के संरक्षक होते हैं।
कार्यक्रम में , संभागीय नोडल अधिकारी, स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना, जबलपुर संभाग ने संग्रहालयों को “अतीत और वर्तमान के मध्य संवाद का जीवंत सेतु” बताते हुए कहा कि में संरक्षित धरोहरें हमारी ऐतिहासिक चेतना की अमूल्य निधि हैं। आधुनिक युग में तकनीक तेजी से बदल रही है, लेकिन संग्रहालय हमारी पहचान और विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। विज्ञान, कला एवं ऐतिहासिक संग्रहालय बच्चों और युवाओं के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
इस अवसर पर , , सहित महाविद्यालय के लगभग 48 विद्यार्थी उपस्थित रहे।


