जबलपुर। जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए कथित रूप से फर्जी और कूटरचित विक्रय पत्र तैयार करने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर विजय नगर पुलिस ने हीरालाल कोष्टा के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़ी धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला ग्राम कठौंदा स्थित कृषि भूमि से जुड़ा है, जो राजस्व रिकॉर्ड में संजय कुमार जैन के दिवंगत पिता सदानंद जैन के नाम पर दर्ज बताई गई है।
शिकायतकर्ता संजय कुमार जैन के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय सदानंद जैन के नाम पर ग्राम कठौंदा में वर्तमान नया खसरा नंबर 312, रकबा 2.15 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। यह भूमि पुराने खसरा नंबर 237/1 से संबंधित बताई गई है। संजय जैन का कहना है कि उनके पिता का निधन 16 मार्च 2004 को हो चुका है और वे उक्त भूमि पर कृषि कार्य करते हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हीरालाल कोष्टा ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 16 अप्रैल 1990 का एक कथित विक्रय पत्र तैयार किया और उसी के आधार पर नायब तहसीलदार अधारताल के समक्ष अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह विक्रय पत्र पूरी तरह फर्जी और कूटरचित है, क्योंकि वर्ष 1990 में जिस खसरा नंबर 312 का उल्लेख दस्तावेज में किया गया है, वह उस समय अस्तित्व में ही नहीं था। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 1991-92 में बंदोबस्त और री-नंबरिंग के बाद पुराने खसरा नंबर 237/1 को नया खसरा नंबर 312 बनाया गया था।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विक्रय पत्र पर उनके पिता सदानंद जैन के वास्तविक हस्ताक्षर नहीं हैं। बैंक रिकॉर्ड में उपलब्ध हस्ताक्षरों और कथित विक्रय पत्र पर मौजूद हस्ताक्षरों की तुलना में अंतर होने की बात भी कही गई है। इसके अलावा, उप-पंजीयक कार्यालय के रिकॉर्ड से भी कथित विक्रय पत्र के निष्पादन की पुष्टि नहीं होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
मामले में एक गंभीर आरोप यह भी है कि न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान पहले खसरा नंबर 312 से संबंधित विक्रय पत्र की प्रति पेश की गई, लेकिन आपत्ति के बाद बिना अनुमति अभिलेख में दूसरी प्रति लगाई गई, जिसमें खसरा नंबर 237/1 लिखा गया था। शिकायतकर्ता ने इसे न्यायालयीन अभिलेख में हेराफेरी और दस्तावेज बदलने का प्रयास बताया है।
पूरे मामले की जांच के बाद पुलिस ने हीरालाल कोष्टा के खिलाफ धारा 467, 468 और 471 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी विक्रय पत्र किसने तैयार किया, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और क्या इसी तरह अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों में भी हेराफेरी की गई है।


