बलपुर। बरगी विधानसभा के पलवा गांव में औचक निरीक्षण पर निकली प्रशासनिक टीम को असलियत का सामना करना पड़ा—और वह भी बिलकुल सीधे-सीधे। कथित विकास कार्यों की चमक-दमक वाली रिपोर्टें जैसे ही ज़मीन पर उतरीं, अधिकारियों की गाड़ियां कीचड़ में फंसकर वहीं ठहरीं।
गांव की सड़कें, जलभराव और दलदल जैसी हालात ने पंचायत के विकास मॉडल पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार की गाड़ियां फंसते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और मौके पर ही उन्होंने अधिकारियों का घेराव कर दिया।
कागज़ों में बेमिसाल, जमीन पर दलदल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास केवल कागजों तक सीमित रह गया। लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन सड़कें अधूरी, नालियां अधूरी और जल निकासी का काम घटिया गुणवत्ता का। “जब आपकी गाड़ियां ही नहीं निकल पा रही हैं, तो सोचिए हम रोज कैसे जी रहे हैं,” ग्रामीणों ने सीधे कहा।
गर्मी में दलदल का तालाब
भीषण गर्मी और जलभराव के बीच गांव की मुख्य सड़कें कीचड़ और गंदे पानी से लबालब हैं। नालियों का निर्माण ठीक से नहीं हुआ, जिससे पूरा गांव एक बड़े दलदल का रूप ले चुका है। और अब इस दलदल में प्रशासन की खुद की गाड़ियां भी फंस गईं—विडंबना की चरम सीमा।
प्रशासन को चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरपंच, सहायक सचिव और अन्य अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करेंगे।
पलवा गांव की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की पोल खोलने वाली है। सवाल वही रह जाता है—विकास की रकम गांव तक पहुंची या रास्ते में कहीं ही “गायब” हो गई?


