क्राइम ब्रांच का स्टाफ बताकर आरोपियों की मारपीट और लूट
एसपी ऑफिस पहुंचा पीड़ित, निष्पक्ष जांच की लगाई गुहार
जबलपुर। विजयनगर थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण, मारपीट और लूट के मामले में नया मोड़ सामने आया है। विगत दिवस एक मामले में पीड़ित सतीश पाण्डे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और मामले में राहुल दीक्षित को मुख्य षड्यंत्रकर्ता के रूप में आरोपी बनाए जाने की मांग करते हुए विस्तृत शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई।
पीड़ित द्वारा एसपी कार्यालय में दिए गए आवेदन के अनुसार विजयनगर थाना में अपराध क्रमांक 0194/2026 दर्ज है, लेकिन अब तक मामले की जांच अधूरी और पक्षपातपूर्ण तरीके से किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित सतीश पाण्डे का कहना है कि घटना के पीछे पूरी साजिश राहुल दीक्षित द्वारा रची गई थी, लेकिन आरोपी के प्रभावशाली लोगों से संबंध होने के कारण पुलिस अब तक उनका नाम प्रकरण में शामिल नहीं कर रही है।
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 23 अप्रैल 2026 की शाम वह दीनदयाल स्थित अपने कार्यालय के बाहर मौजूद थे, तभी कुछ युवक वहां पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच का कर्मचारी बताकर पूछताछ के बहाने उन्हें अपने साथ ले गए। आरोप है कि युवकों ने उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर पाटन बायपास स्थित नीलकमल ढाबा के समीप सुनसान स्थान पर ले जाकर बेरहमी से मारपीट की।
पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे उनका पैर टूट गया और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, मारपीट के दौरान आरोपियों ने उनके गले से सोने की चेन, हाथ की अंगूठियां और करीब 40 हजार रुपये नकद भी छीन लिए। घटना के बाद घायल अवस्था में उन्हें छोड़कर आरोपी फरार हो गए।
सतीश पाण्डे ने शिकायत में कहा है कि सूरतलाई क्षेत्र में स्थित एक अनुबंधित प्लॉट को बेचने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि इसी जमीन विवाद और आर्थिक दबाव के चलते पूरी वारदात को अंजाम दिया गया, ताकि उन्हें डराकर संपत्ति से संबंधित निर्णय लेने के लिए मजबूर किया जा सके।
पीड़ित ने सीधे तौर पर राहुल दीक्षित पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की योजना उन्हीं के इशारे पर बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि घटना से पहले और बाद में आरोपियों के बीच लगातार संपर्क हुआ था, जिसकी पुष्टि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने राहुल दीक्षित समेत अन्य संदिग्धों की कॉल डिटेल निकलवाने और मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मामले में दर्ज धारा 180 बीएनएसएस के तहत उनके बयान में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया, जिससे जांच की दिशा प्रभावित हो रही है। पीड़ित ने अपने बयान में संशोधन कराने और पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं इस मामले को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, क्योंकि पीड़ित ने सीधे तौर पर एक प्रभावशाली व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या राहुल दीक्षित का नाम औपचारिक रूप से प्रकरण में जोड़ा जाता है।


