जबलपुर। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में विकासखंड स्तर पर चलाये जा रहे ‘कृषि रथ’ ने आज पांचवें दिन पाटन विकासखंड के रमखिरिया, कुशली और खजरी की यात्रा की। इस दौरान किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती के तौर -तरीकों की जानकारी दी गई।
कृषि रथ के भ्रमण के दौरान ग्राम खजरी के प्रगतिशील कृषक और युवा उद्यमी अंश सिंह चंदेल के फार्म पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय किसानों के समक्ष पशुपालन को अधिक लाभप्रद बनाने और हरे चारे की कमी को दूर करने के उद्देश्य से “पॉलीथिन पैकिंग मेथड” से साइलेज बनाने की विधि का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन ने किसानों को बताया कि इस आसान और कम लागत वाली विधि से किसान लंबे समय तक अपने पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा सुरक्षित रख सकते हैं। युवा कृषक अंश सिंह ने बताया कि साइलेज दरअसल हरे चारे को बिना सुखाए, उसमें मौजूद पोषक तत्वों को सुरक्षित रखते हुए लंबे समय तक स्टोर करने की एक वैज्ञानिक तकनीक है। इसे ‘चारे का अचार’ भी कहा जाता है।
किसानों को बताया गया कि साइलेज बनाने मिल्किंग स्टेज में गन्ना एवं नेपियर की फसल का चयन किया जा सकता है। इस स्टेज में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। सबसे पहले चारे को कुट्टी मशीन की मदद से 1 से 2 सेंटीमीटर के छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। कटी हुई कुट्टी को मजबूत, मोटी और हवा रोधी पॉलीथिन बैग में परतों में भरा जाता है। हर परत को अच्छी तरह से दबाया जाता है ताकि उसके अंदर की पूरी हवा बाहर निकल जाए। हवा अंदर रहने पर चारा सड़ सकता है।
इसके बाद चारे में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए पानी में थोड़ा गुड़ और नमक मिलाकर चारे की परतों पर छिड़काव किया जाता है। बैग को पूरा भरने के बाद उसके मुंह को रस्सी या टेप से इतनी मजबूती से बांध दिया जाता है कि बाहर की हवा या नमी अंदर न जा सके। इन बैग्स को किसी सुरक्षित और छायादार स्थान पर रख दिया जाता है। लगभग 45 से 50 दिनों में पौष्टिक और खुशबूदार साइलेज बनकर तैयार हो जाता है, जिसे दुधारू पशु बेहद चाव से खाते हैं और इससे दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
पालीथिन पैकिंग मेथड से साइलेज बनाने के तरीके के प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी पंकज श्रीवास्तव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी देवआनंद सिंह भी उपस्थित रहे।


