जबलपुर। जिले में ईद-उल-अजहा का त्योहार पूरे उत्साह, अकीदत और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया। इस दौरान शहर की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में सुबह 7:30 बजे से लेकर 10:30 बजे तक विशेष नमाज अदा की गई, जिसमें देश में अमन, चैन, शांति और खुशहाली के लिए सामूहिक दुआएं मांगी गईं। रानीताल ईदगाह में मध्यप्रदेश के मुफ्ती-ए-आजम हजरत मौलाना डॉ. मुशाहिद रजा कादरी ने नागरिकों को संबोधित करते हुए शांति, शालीनता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से भ्रामक अफवाहों से बचने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। इस धार्मिक आयोजन में नायब मुफ्ती-ए-आजम सूफी जियाउल हक कादरी बुरहानी, हाफिज मोहम्मद ताहिर साहब, मौलाना सुल्तान अहमद साहब, हाफिज काजी अमीर अशरफ हुसैनी मियां, हाफिज सादिक मिस्बाही, सुल्तान अहमद कादरी साहब और मौलाना हैदर मेहदी साहब ने अलग-अलग स्थानों पर नमाज की कयादत की।
ईदगाहों और मस्जिदों में नमाजियों का जनसैलाब
शहर के सभी प्रमुख उपासना स्थलों पर सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। रानीताल ईदगाह, मोमिन ईदगाह गोहलपुर, ईदगाह सदर बाजार, गढ़ा ईदगाह, मंडी मदार टेकरी जामा मस्जिद, आगा मोहम्मद साहब की दरगाह, शिया जामा मस्जिद फूटाताल और सुब्हानिया मस्जिद सहित शहर की अन्य छोटी-बड़ी मस्जिदों में अकीदतमंदों ने कतारबद्ध होकर नमाज अदा की। निर्धारित समय के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष प्रार्थनाएं की गईं। नमाज संपन्न होने के बाद मस्जिदों के इमामों द्वारा खुत्बा पढ़ा गया, जिसमें त्योहार के महत्व और धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी गई। खुत्बा पूरा होने के बाद सभी नमाजियों ने सामूहिक रूप से हाथ उठाकर देश की तरक्की और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की प्रार्थना की।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच सामाजिक एकता का संदेश
धार्मिक गुरुओं ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और आपसी भाईचारे पर विशेष जोर दिया। नागरिकों से अपील की गई कि वे त्योहार मनाते समय दूसरों की भावनाओं का पूरा सम्मान करें और किसी भी प्रकार की गलत जानकारियों पर ध्यान न दें। मुफ्ती-ए-आजम ने आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सराहना की। पर्व के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल हर जगह मुस्तैद दिखाई दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों और प्रमुख ईदगाहों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए थे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका।
धार्मिक परंपराओं का निर्वाह, मुबारकबाद का दौर
विशेष नमाज और सामूहिक दुआ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ईदगाहों और मस्जिदों के बाहर उत्सव का माहौल देखा गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में त्योहार को लेकर भारी उत्साह नजर आया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। इसके बाद सभी नागरिक अपने-अपने घरों की ओर रवाना हुए, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कुर्बानी की रस्म पूरी की गई। घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए और लोगों ने अपने मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों का स्वागत कर त्योहार की खुशियां बांटीं।


