छपारा – नगर से होकर बहने वाली सिवनी जिले की जीवन रेखा बैनगंगा नदी के छपारा नगर परिषद क्षेत्र में जमा सिल्ट या गाद निकालने के लिए लंबे समय से लोग मांग कर रहे थे, जिससे किसानों को यह उपजाऊ मिट्टी सहित नदी गहरी करण होने से जल संरक्षण की दिशा में एक शानदार पहल है, जिसको लेकर सिंचाई विभाग द्वारा नगर परिषद छपारा को बकायदा अनुमति प्रदान की गई है जो स्थानीय सहित आसपास के किसानों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं हैं।
विदित हो कि नदी की जल भराव क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशासन ने लंबे समय बाद जमा गाद (सिल्ट) को हटाने की अधिकारिक अनुमति प्रदान कर दी है। यह अनुमति कार्यालय कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बायी तट नहर संभाग, केवलारी द्वारा जारी की गई है।
जानकारी के अनुसार, नदी में बांध बन जाने के बाद छपारा क्षेत्र में करवला घाट, प्राचीन सिद्ध बाबा घाट से लेकर ब्रिटिश कालीन पुल तक वर्षों से मिट्टी और गाद के जमा होने के कारण जल संग्रहण क्षमता लगातार घटती जा रही थी। इसके परिणामस्वरूप गर्मी के मौसम में छपारा नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। पिछले वर्ष में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप से सामने आई थी। वही नगर परिषद की सार्थक पहल से गाद हटाए जाने के बाद नदी की जल भराव क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे छपारा क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। इससे आने वाले समय में स्थानीय नागरिकों को जल संकट से बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं नगर परिषद के इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों और कुम्भकार समुदाय को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। किसान इस उपजाऊ गाद का उपयोग अपने खेतों में कर सकेंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
*कार्य एजेंसी ने मौका स्थल को नहीं किया चिंहित* बैनगंगा नदी मे चल रहें कार्य की जो भी एजेंसी है वो बैनगंगा तट पर चल रहे सिल्ट सफाई कार्य बिना तकनीकी अधिकारी के चल रहा था नदी सफाई कार्य से कुम्हार संघ के साथ किसान व नगरवासियों बहुत खुश थे दो दिन बाद देखते ही देखते पहाड़ी नुमा टिला जो छपारा को प्रकृति ने दिया है उसे धीरे धीरे गिराया जाने लगा जिससे नगर वासियों ने रोष कार्यालय कार्यपालन यंत्री, प्रशासन नगरपरिषद अध्यक्ष श्रीमती निशा पटैल सीएमओ गीता बाल्मीकि से की शिकायत मौका स्थल देखा नाराजगी जताते हुए खोदे हुए टिला पर फिर से फिलिंग करने को कहा।
*कुम्हारों ने ली राहत की सांस*
नगर में चल रही ईंट भट्टा उठाने की चर्चा का किया खंड सीएमओ ने कहां आरक्षित भूमि पर कुम्भकारों के ईंट भट्टा लग रहें हैं वो यथावत जहां लग रहे वहीं लगेंगे साथ ही आरक्षित भूमि से सिल्ट ईंट भट्टा परिवहन कर सकेंगे।
वहीं कुम्भकार समुदाय इसी मिट्टी का उपयोग दीये, मटके एवं अन्य पारंपरिक मिट्टी के उत्पाद बनाने में कर सकेगा। स्थानीय प्रशासन के इस कदम को जल संरक्षण, कृषि सुधार और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


