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May 30, 2026
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पूर्व पीएम शेख हसीना ने अवामी लीग नेताओं की मौत को बताया सुनियोजित हत्या, जांच की मांग



ढाका, 29 मई बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश भर में कई अवामी लीग नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) सरकार पर आरोप लगाया कि वह उस हिंसा के चक्र को आगे बढ़ा रही है, जिसकी शुरुआत पूर्व अंतरिम सरकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में हुई थी।


उन्होंने कहा कि यह स्थिति दिखाती है कि देश में कानून के शासन को लेकर गंभीर कमी है और राजनीतिक हिंसा का चिंताजनक पैटर्न लगातार जारी है।

यह बयान उस घटना के बाद आया, जब 78 वर्षीय मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की गुरुवार की दोपहर ढाका के स्क्वायर अस्पताल में मौत हो गई। वे एक अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व अवामी लीग सांसद थे। उनकी खराब स्वास्थ्य के चलते जमानत मिलने के तीन महीने बाद मौत हुई।

जुलाई 2024 के प्रदर्शन के बाद हुए राजनीतिक बदलावों के बाद, उन्हें तीन अक्टूबर 2024 को हिरासत में लिया गया था। उन पर बालियाडांगी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक कथित जबरन वसूली मामले में आरोप था। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिल गई थी।

शेख हसीना ने मोहम्मद दबीरुल इस्लाम की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि वे भी पूर्व अंतरिम सरकार के कथित अत्याचारों का शिकार बने।

अवामी लीग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में शेख हसीना ने कहा, ”गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बाद उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी, फिर उन्हें 19 फरवरी को जमानत मिली। हालांकि उनके बेटे, पूर्व सांसद मजहरुल इस्लाम सुजान, अभी भी झूठे मामलों में फंसे हुए हैं। एक ही केस में दो लोगों के लिए अलग-अलग फैसले कई सवाल खड़े करते हैं।”

उन्‍होंने कहा क‍ि यह कोई प्राकृतिक मौत नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। इस तरह मुहम्मद यूनुस की सरकार ने हमारे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को मारा था। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मौजूदा सरकार भी इसी प्रक्रिया को जारी रख रही है, जो कानून के शासन के प्रति किसी भी जिम्मेदारी को नहीं दिखाती।”

हसीना ने बताया कि यह घटना हाल ही में एक अन्य वरिष्ठ अवामी लीग नेता और पूर्व सांसद रमेश चंद्र सेन की मौत के बाद हुई है। वह ठाकुरगांव-1 क्षेत्र से सांसद थे और सात फरवरी को दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत के दौरान बीमार पड़ने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

उन्होंने कहा क‍ि एक ही जिले के दो महत्वपूर्ण और सम्मानित नेताओं की मौत सवाल उठाती है कि क्या यह सिर्फ संयोग है या किसी योजनाबद्ध घटनाओं की श्रृंखला का हिस्सा है। इसकी जांच होनी चाहिए।

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