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Jabalpur
June 16, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

निसर्ग रिसॉर्ट में युवक की मौत के मामले में आरोपी विवेक त्रिपाठी को मिली जमानत

जबलपुर।  निसर्ग रिसॉर्ट में 24 मई 2026 को स्विमिंग पूल के पास करंट लगने से साजन विश्वकर्मा की मृत्यु के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी विवेक त्रिपाठी को जमानत दे दी है। साजन अपने दोस्तों के साथ रिसॉर्ट में घूमने और नहाने गया था। वहां पूल के पास लगे 1 लोहे के पाइप में ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार का इंसुलेशन खराब होने के कारण अचानक करंट आ गया था। उस पाइप के संपर्क में आते ही साजन गंभीर रूप से करंट की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि इस दुखद घटना से पहले भी 1 अन्य व्यक्ति को उसी पाइप से बिजली का झटका लगा था। इसकी स्पष्ट सूचना रिसॉर्ट कर्मचारियों को दी गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा के लिए प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने रिसॉर्ट प्रबंधन पर भारी लापरवाही का केस दर्ज किया था। अब अदालत ने मामले में सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद विवेक त्रिपाठी को जमानत की राहत प्रदान कर दी है।

बचाव पक्ष ने अदालत में पेश की प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़ी अहम दलीलें

अदालत ने पूरी घटना को प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए दी रिहाई
बचाव पक्ष ने अदालत में पेश की प्रबंधन की जिम्मेदारी से जुड़ी अहम दलीलें
न्यायालय में जमानत याचिका पर सुनवाई के समय विवेक त्रिपाठी के वकील ने बचाव में कई तर्क रखे। अधिवक्ता ने अदालत को स्पष्ट रूप से बताया कि उनका मुवक्किल रिसॉर्ट के रोजमर्रा के कामकाज, रखरखाव और स्विमिंग पूल इलाके की सुरक्षा का सीधा प्रभारी नहीं था। अपनी बात को सही साबित करने के लिए बचाव पक्ष ने अदालत के सामने नियुक्ति और प्रबंधन से जुड़े कागजात भी पेश किए। इन दस्तावेजों के आधार पर यह कहा गया कि रिसॉर्ट चलाने और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी अन्य अधिकृत कर्मचारियों और प्रबंधकों की थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि विवेक त्रिपाठी के खिलाफ किसी आपराधिक मंशा या सीधी लापरवाही का कोई पक्का सबूत पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है और उन्हें बिना वजह हिरासत में रखा गया है।

अदालत ने पूरी घटना को प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए दी रिहाई

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और पुलिस की जांच स्थिति पर बारीकी से गौर किया। न्यायाधीश ने माना कि पहली नजर में यह पूरा मामला सीधे तौर पर लापरवाही के कारण हुए हादसे का ही लगता है। अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी विवेक त्रिपाठी काफी समय से न्यायिक हिरासत में है और अब उससे मामले में किसी विशेष या अतिरिक्त पूछताछ की जरूरत नहीं बची है। इसके अलावा न्यायालय ने पाया कि आरोपी के भागने या मामले से जुड़े साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने की आशंका भी बहुत कम है। इन सभी जमीनी परिस्थितियों और तथ्यों को आधार बनाते हुए अदालत ने विवेक त्रिपाठी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उन्हें तय कानूनी शर्तों के पालन के साथ जेल से रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

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