(कोतमा) – भीषण गर्मी और तपते पारे के बीच जहाँ एक ओर सरकार जल स्रोतों और आम जन के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोतमा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से अपने विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए तहसील और एसडीएम कार्यालय पहुँचने वाले लोग इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कार्यालय परिसर में पीने के साफ और ठंडे पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को प्यासे ही वापस लौटना पड़ रहा है, जो कि मानवीय दृष्टिकोण से बेहद संवेदनहीन है।
छत की टंकी में उबल रहा पानी, बाथरूम के नलों का सहारा
कार्यालय परिसर की स्थिति यह है कि छत पर रखी पानी की टंकी सीधी धूप की चपेट में रहने के कारण खौलने लगती है। यही खौलता हुआ पानी बाथरूम और हैंडवॉश के नलों में सप्लाई हो रहा है। ऐसे में दूर-दराज के गाँवों से आए ग्रामीणों के सामने मजबूरी में इसी गर्म पानी से गला तर करने या बाहर से पैसे खर्च कर पानी खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
सीएसआर (CSR) मद से हो सकती है व्यवस्था
क्षेत्रीय नागरिकों और जागरूक जनों का कहना है कि कोतमा और आसपास के क्षेत्रों में कई बड़ी औद्योगिक कंपनियाँ कार्यरत हैं। प्रशासन चाहे तो इन कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद का उपयोग कर कार्यालय परिसर में तत्काल एक आरो (RO) वाटर कूलर लगवा सकता है। यदि इसमें तकनीकी या समय की बाधा है, तो तात्कालिक राहत के रूप में परिसर में शीतल जल के मटके (पियाऊ) रखवाए जा सकते हैं।
कलेक्टर और एसडीएम से संवेदनशीलता की गुहार
क्षेत्र की जनता ने अनूपपुर जिले के आदरणीय कलेक्टर महोदय एवं अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कोतमा से विनम्र निवेदन किया है कि वे इस गंभीर समस्या पर संवेदनशीलता दिखाएं। आम जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्यालय में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सुदूर ग्रामीण अंचलों से आने वाला कोई भी व्यक्ति इस भीषण गर्मी में प्यासा न लौटे।


