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June 17, 2026
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18 जून 2026 का पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का विशेष महत्व, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली, 17 जून। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से 18 जून 2026 (गुरुवार) का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो शाम 7 बजे तक रहेगी। चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है और इस दिन विनायक चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाएगा। इसलिए गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। वहीं, इस दिन गुरुवार पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है। हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। यह दिन ज्ञान, धर्म, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और गुरु कृपा की कामना करते हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 9 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रमा का उदय सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर और चंद्रास्त रात 10 बजकर 4 मिनट पर होगा। चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा, जबकि सूर्य मिथुन राशि में स्थित है। ज्योतिष के अनुसार कर्क राशि में चंद्रमा का होना भावनाओं और पारिवारिक संबंधों को अधिक प्रभावशाली बनाता है। ऐसे में इस दिन लोग परिवार और घर-गृहस्थी से जुड़े विषयों पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं। नक्षत्र की बात करें तो सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए इसे अनुकूल माना जाता है। इसके बाद अगला नक्षत्र प्रभावी होगा। इस दिन व्याघात योग शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। वहीं वणिज करण सुबह 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, जिसे व्यापार और आर्थिक लेन-देन के लिए अच्छा माना जाता है। यदि शुभ मुहूर्त की बात करें तो इन दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 33 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यह समय किसी भी महत्वपूर्ण और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। दूसरी ओर राहुकाल दोपहर 1 बजकर 43 मिनट से 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक और यमघण्टकाल सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। इस दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। इसलिए यदि दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो तो शुभ उपाय करके निकलना बेहतर माना जाता है। वर्तमान में ग्रीष्म ऋतु और उत्तरायण काल चल रहा है, जिन्हें धार्मिक दृष्टि से शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है।

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