व्यावसायिक विकास (CPD) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
महर्षि विद्या मंदिर, बालाघाट में दिनांक 8 जून से शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development – CPD) हेतु तीन दिवसीय इन-हाउस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य एवं कोर्स डायरेक्टर श्री सतीश कुमार चौरसिया, रिसोर्स पर्सन श्री नीरज तिवारी तथा विद्यालय परिवार के 42 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रथम दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती, गुरु परंपरा एवं महर्षि महेश योगी जी के छायाचित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ। गुरु पूजन के उपरांत भावातीत ध्यान शिक्षिका श्रीमती सुनीता तिवारी के कुशल निर्देशन में भावातीत ध्यान, भावातीत ध्यान सिद्धि कार्यक्रम तथा यौगिक उड़ान का सामूहिक अभ्यास कराया गया।
महर्षि विद्या मंदिर राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार कार्यक्रम का संचालन किया गया। सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कोर्स डायरेक्टर श्री सतीश कुमार चौरसिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षक प्रशिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्यालय समूह के अध्यक्ष वेद मार्तण्ड ब्रह्मचारी श्री गिरीशचंद्र वर्मा जी के कुशल मार्गदर्शन में शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास हेतु ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम देशभर के महर्षि विद्या मंदिर विद्यालयों में नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
प्रथम शैक्षणिक सत्र में रिसोर्स पर्सन श्री नीरज तिवारी ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व पर चर्चा की तथा सीबीएसई की अध्ययन योजना (Scheme of Studies) के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
द्वितीय शैक्षणिक सत्र पूर्णतः मूल्य शिक्षा (Value Education) पर केंद्रित रहा, जिसका संचालन रिसोर्स पर्सन द्वारा किया गया। उन्होंने पीपीटी, प्रेरणादायक उदाहरणों, समूह चर्चाओं एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से मूल्य आधारित शिक्षा की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से दक्ष बनाना नहीं है, बल्कि उनमें नैतिकता, अनुशासन, सहानुभूति, सत्यनिष्ठा, जिम्मेदारी, सहयोग, नेतृत्व क्षमता तथा राष्ट्रप्रेम जैसे मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है।
श्री तिवारी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति और प्रतिस्पर्धा के बढ़ते दौर में विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण तथा भावनात्मक संतुलन के लिए मूल्य शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने शिक्षकों को कक्षा-कक्ष की दैनिक गतिविधियों, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं, प्रार्थना सभाओं, सहशैक्षिक गतिविधियों तथा अपने व्यक्तिगत आचरण के माध्यम से विद्यार्थियों में सकारात्मक मूल्यों के विकास हेतु प्रेरित किया।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में बताया कि समग्र एवं बहुआयामी शिक्षा की परिकल्पना तभी सफल हो सकती है, जब विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनके नैतिक, सामाजिक एवं भावनात्मक पक्ष का भी समुचित संवर्धन किया जाए। सत्र के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न मूल्य-आधारित गतिविधियों एवं नवाचारों पर अपने विचार साझा किए, जिससे चर्चा अत्यंत रोचक, प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक बन गई। श्री तिवारी ने अंत में कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा ही विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील एवं आदर्श नागरिक बनाने का सशक्त माध्यम है।
दिनभर की गतिविधियों का समापन प्राणायाम, भावातीत ध्यान तथा भावातीत ध्यान सिद्धि कार्यक्रम के सामूहिक अभ्यास के साथ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान, कौशल एवं व्यावसायिक दक्षताओं के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।


