सिवनी जिले के बरघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायतों और नगर मुख्यालय से लगातार नाबालिग लड़कियों के गुमशुदा होने के मामले सामने आने से क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद बरघाट पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता के चलते अब आम जनता का कानून व्यवस्था और खाकी पर से भरोसा उठता नजर आ रहा है।
*क्या है पूरा मामला*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में बरघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों और नगर से कई नाबालिग लड़कियां संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई हैं। परिजनों ने अपनी बेटियों को तलाशने के लिए थाने के चक्कर काटे, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या मुस्तैदी देखने को नहीं मिली है।
परिजनों का दर्द: “हम अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पुलिस के पास जाते हैं तो सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कोई जांच होती नहीं दिख रही। ऐसा लगता है जैसे प्रशासन को हमारी तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है।”
*जनता में आक्रोश, उठ रहे हैं गंभीर सवाल*
लापता नाबालिगों के मामलों में पुलिस द्वारा त्वरित गति से जांच न किए जाने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। क्षेत्र में यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर पुलिस इतनी संवेदनहीन क्यों बनी हुई है?
पहला सवाल: क्या पुलिस किसी बड़े संगठित गिरोह (Human Trafficking) के नेटवर्क को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है?
दूसरा सवाल: क्या पुलिस के पास इन मामलों को सुलझाने के लिए पर्याप्त संसाधन या इच्छाशक्ति नहीं है?
तीसरा सवाल: यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र की बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
*पुलिस की कार्यप्रणाली पर ‘मौन’ रहने का आरोप*
आमतौर पर नाबालिगों की गुमशुदगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि तत्काल ‘अपहरण’ (IPC/BNS के तहत) का मामला दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया जाए। लेकिन बरघाट पुलिस की इस कथित सुस्ती से आम पब्लिक का भरोसा पुलिसिया तंत्र से पूरी तरह डगमगा गया है।
स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुमशुदा नाबालिग लड़कियों को सकुशल वापस नहीं लाया गया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।


