जबलपुर। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के साथ प्रदेशभर में ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत हो चुकी है। शासन सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों के समकक्ष सुविधाएं देने का दावा कर रहा है, लेकिन जबलपुर जिले के कई सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। पहले ही दिन अनेक स्कूलों में ताले लटके मिले, कहीं गंदगी का अंबार दिखा तो कहीं जर्जर भवनों में बच्चों की पढ़ाई होती नजर आई।
निर्धारित समय के बाद भी नहीं खुले स्कूल
शासन के निर्देशानुसार स्कूलों का समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक निर्धारित है, लेकिन जिले के एक दर्जन से अधिक ग्रामीण स्कूलों में सुबह 11 बजे तक भी मुख्य द्वार पर ताले लटके मिले। जो स्कूल खुले थे, वहां भी साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी। कमरों में धूल की मोटी परत, दीवारों पर जाले और अव्यवस्थित परिसर देखने को मिला। कई स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंचे थे, जबकि कुछ स्थानों पर शिक्षक भी अनुपस्थित मिले। दो-तीन शिक्षकों वाले स्कूलों में भी केवल एक शिक्षक ही मौजूद था।
जर्जर भवनों में पढ़ाई, हादसे का खतरा
ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। हालत ऐसी है कि शिक्षक भी भवन के अंदर जाने से डरते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई इन्हीं खंडहरनुमा कमरों में कराई जा रही है। अभिभावकों में भी इन स्कूलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
11 स्कूल शिक्षकविहीन, 121 में केवल एक शिक्षक
लोक शिक्षण संचालनालय को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार जिले के 11 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जबकि 121 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई स्कूलों में आवश्यकता के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कहीं छात्रों की संख्या कम होने के बावजूद अधिक शिक्षक हैं, तो कहीं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बावजूद शिक्षकों का अभाव है।
सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का घट रहा भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक कई अभिभावकों का सामान्य सरकारी स्कूलों से भरोसा उठता जा रहा है। वे अपने बच्चों को केवल कुछ चुनिंदा सरकारी स्कूलों में ही भेजना चाहते हैं। कमजोर व्यवस्थाओं वाले स्कूलों में बच्चों का प्रवेश लगातार घट रहा है।
अधिकारियों का पक्ष
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन 11 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां विद्यार्थियों को अन्य स्कूलों में समायोजित कर दिया गया है। वहीं एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों की तैनाती कर शिक्षण व्यवस्था संचालित की जा रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।


