_उपसरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग, सरपंच व पूर्व सचिव पर लगाए गंभीर आरोप_
बरघाट/आमागढ़ – जनपद पंचायत बरघाट अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकरी में विकास कार्यों के नाम पर लगभग 10 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। उपसरपंच, वार्ड पंचों और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि सड़क और नाली निर्माण कार्य कराए बिना ही शासकीय राशि का भुगतान निकाल लिया गया। शिकायत में मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत टिकरी के तत्कालीन सचिव सीताराम मात्रे का स्थानांतरण होने के बावजूद वित्तीय लेन-देन जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन सचिव और वर्तमान सरपंच श्रीमती आरती यादव की कथित मिलीभगत से वार्ड क्रमांक-8 में प्रस्तावित सीमेंट सड़क एवं नाली निर्माण कार्य किए बिना ही लगभग 10 लाख रुपये की राशि आहरित कर ली गई।
ग्रामीणों ने बताया कि सैलू सभा मंच से स्कूल तक तथा ग्राम बरवाह मार्ग पर विनोद के घर से सहतर के घर तक सीमेंट सड़क एवं नाली निर्माण के लिए शासन से राशि स्वीकृत हुई थी। उनका कहना है कि मौके पर आज भी निर्माण कार्य दिखाई नहीं देता, जबकि पंचायत के अभिलेखों में राशि निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
उपसरपंच बलराम चौरसिया सहित वार्ड पंचों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं कराई गई तो पंचायत में विकास कार्य प्रभावित होंगे और शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए, संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए तथा यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की रिकवरी की जाए।
इस संबंध में जिला कलेक्टर के अलावा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिवनी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बरघाट को भी शिकायत की प्रतिलिपि भेजी गई है।
शिकायत पत्र पर उपसरपंच बलराम चौरसिया, विनोद कुमार, गनाराम साहू, विजय शाह, रामनाथ मसकोले, सुखचंद सहित अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान दर्ज हैं।
फिलहाल मामला शिकायत के आधार पर सामने आया है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अथवा जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच कब शुरू होती है और उसके आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।


