November 6, 2026
सी टाइम्स
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भारत की भूमिका दर्शक भर की

नई दुनिया को परिभाषित करने वाली तकनीकों में अपना प्रतिमान बनाने की होड़ में भारत बहुत पीछे छूट गया है। नतीजतन अमेरिकी या चीनी प्रतिमानों में से किसी एक पर निर्भर होना हमारी नियति बन गई है।
खबर है कि फेबल-5 और माइथोस-5 जैसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मॉडल्स तक विदेशियों की पहुंच रोकने के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के आदेश के बाद भारत की बड़ी कंपनियां भी चीन के ऑपेन सोर्स मॉडल वाले एआई एजेंट्स की सेवाएं ले रही हैं। सस्ता होने के कारण स्टार्ट-अप कंपनियों के बीच पहले से ही चीनी मॉडल लोकप्रिय हैं। स्पष्टत: यह रुझान हाई टेक क्षेत्र में हमारी निराशाजनक उपस्थिति का प्रमाण है। नई दुनिया जिन तकनीकों से परिभाषित होगी, उनमें भारत की मौजूदगी महज हेडलाइन और नैरेटिव निर्माण तक सीमित है। जबकि कड़वी हकीकत यह है कि उन तकनीकों में अपना मॉडल और प्रतिमान बनाने के लक्ष्य में भारत बहुत पीछे छूट गया है। ऐसे में अमेरिकी या चीनी प्रतिमानों में से किसी एक पर निर्भर होना हमारी नियति बन गई है।
एआई के बाद अब क्वांटम कंप्यूटिंग में अमेरिका और चीन के बीच तीखी होड़ शुरू हो चुकी है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्वांटम कंप्यूटिंग को राष्ट्रीय रणनीतिक संपत्ति घोषित करने वाले कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही अमेरिकी कंपनियों के लिए दो बिलियन डॉलर के विशेष पैकेज की घोषणा की। विशेषज्ञों के मुताबिक यह नए तकनीक युद्ध की शुरुआत है। अमेरिका का ध्यान विशेष रूप से क्वांटम वेफर उत्पादन और जीपीएस की जगह लेने वाले क्वांटम सेंसर्स के सैन्य इस्तेमाल पर केंद्रित है, ताकि भविष्य के युद्धों में सिग्नल जैमिंग जैसी चुनौतियों को बेअसर किया जा सके।
मगर चीन इस बिसात पर पीछे नहीं है। उसने अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) में क्वांटम तकनीक को भविष्य के छह प्रमुख उद्योगों में सबसे ऊपर रखा है। मार्केट रिसर्च कंपनी मैकिन्से के अनुमानों के अनुसार चीन का सार्वजनिक निवेश 15 बिलियन डॉलर से अधिक है, जो अमेरिकी सरकारी निवेश से लगभग दोगुना है। जहां अमेरिका निजी क्षेत्र के नवाचार और सेमीकंडक्टर प्रभुत्व पर भरोसा कर रहा है, वहीं चीन का दृष्टिकोण राज्य-नियोजित और रणनीतिक है। इस राह पर चलते हुए उसने इस क्षेत्र में आरंभिक बढ़त बना ली है। यही कथा रॉबोटिक्स और बायोटेक क्षेत्रों की है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन सब में भारत की भूमिका दर्शक भर की रह गई है।

 

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