बरघाट (सिवनी)। सिवनी जिले की बरघाट तहसील से सामने आया एक मामला वित्तीय संस्थानों की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, केवाईसी सत्यापन व्यवस्था तथा क्रेडिट ब्यूरो में दर्ज होने वाले वित्तीय अभिलेखों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता नजर आ रहा है। मामला उस समय प्रकाश में आया जब एक व्यक्ति ने अपनी क्रेडिट रिपोर्ट (सिबिल) की जांच की और उसमें पहले से चल रहे वैध वाहन ऋण के अतिरिक्त एक अन्य कमर्शियल व्हीकल लोन की एंट्री दर्ज पाई, जिसे उसने पूरी तरह फर्जी और संदिग्ध बताया है।
पीड़ित के अनुसार उसने पूर्व में श्रीराम फाइनेंस से एक पिकअप वाहन खरीदने के लिए विधिवत ऋण लिया था, जिसकी समस्त प्रक्रिया, दस्तावेज एवं किस्तों की जानकारी उसे है। किंतु हाल ही में प्राप्त क्रेडिट रिपोर्ट में 24 फरवरी 2026 की तिथि से ₹2,60,000 का एक अतिरिक्त कमर्शियल व्हीकल लोन प्रदर्शित हुआ, जिसने उसे आश्चर्यचकित कर दिया। रिपोर्ट में उक्त खाते के विरुद्ध लगभग ₹2,46,487 की बकाया राशि तथा ₹7,923 की ओवरड्यू ईएमआई भी दर्शाई गई है। संबंधित लोन संख्या/अकाउंट आईडी BARGT2602240007 / XX0007 अंकित है।
पीड़ित का स्पष्ट कहना है कि 24 फरवरी 2026 को उसने किसी भी प्रकार का नया वाहन ऋण नहीं लिया, न किसी ऋण आवेदन पर हस्ताक्षर किए, न कोई केवाईसी प्रक्रिया पूरी की और न ही उसके बैंक खाते में इस कथित ऋण की राशि प्राप्त हुई। ऐसे में उसकी क्रेडिट रिपोर्ट में उक्त ऋण की उपस्थिति कई प्रकार की शंकाओं को जन्म देती है।
यदि पीड़ित के दावे तथ्यात्मक रूप से सही सिद्ध होते हैं, तो यह मामला केवल एक गलत डेटा एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय प्रणाली में पहचान सत्यापन, दस्तावेज प्रमाणीकरण और ऋण वितरण की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। यह जांच का विषय बन जाता है कि आखिर यह ऋण किस व्यक्ति के नाम पर स्वीकृत हुआ, किन दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृति दी गई, संबंधित केवाईसी किसने सत्यापित की, ऋण की राशि किस बैंक खाते में स्थानांतरित हुई तथा उस ऋण से खरीदा गया वाहन वर्तमान में किसके नाम पंजीकृत है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति की क्रेडिट रिपोर्ट में गलत अथवा विवादित ऋण की प्रविष्टि उसके सिबिल स्कोर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप भविष्य में गृह ऋण, वाहन ऋण, व्यवसायिक ऋण अथवा अन्य बैंकिंग सुविधाओं के लिए आवेदन करने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में ऐसी प्रविष्टियां वित्तीय विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।
पीड़ित ने संबंधित वित्तीय संस्था, क्रेडिट ब्यूरो तथा सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष, तकनीकी एवं दस्तावेजी जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी आग्रह किया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की त्रुटि, डेटा मिक्सिंग, फर्जीवाड़ा अथवा प्रक्रिया संबंधी अनियमितता सामने आती है तो विवादित लोन एंट्री को तत्काल क्रेडिट रिकॉर्ड से हटाकर दोषी व्यक्तियों अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फिलहाल मामले की आधिकारिक पुष्टि अथवा संबंधित वित्तीय संस्था का पक्ष सामने आना शेष है।


