अनूपपुर । नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0 मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक प्रमुख जन-जागरूकता अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों और विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना और ‘नशामुक्त मध्य प्रदेश’ का निर्माण करना है। इस अभियान के माध्यम से छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
स्वस्थ समाज और नशामुक्त प्रदेश का सपना तभी साकार हो सकता है, जब नशे के खिलाफ लड़ाई केवल नारों, पोस्टरों और जागरूकता अभियानों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी दिखाई दे। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ जैसे अभियानों के जरिए छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है, क्योंकि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज, परिवार और खासकर युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है।लेकिन इसी बीच एक बुनियादी सवाल भी सामने आता है। एक तरफ नारों और मंचों से नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है, तो दूसरी ओर शराब की वैध बिक्री का कारोबार भी लगातार जारी है। होटल, बार और रेस्टोरेंट में शराब की उपलब्धता है, वहीं कई इलाकों में अवैध शराब और कच्ची शराब की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं। ऐसे में सवाल यह नहीं कि जागरूकता अभियान क्यों चलाया जा रहा है, बल्कि सवाल यह है कि नशे के खिलाफ पूरी लड़ाई कितनी व्यापक और प्रभावी है?नशे की समस्या केवल किसी एक पदार्थ या एक वर्ग तक सीमित नहीं है। शराब, मादक पदार्थ और अवैध नशे का कारोबार एक पूरी श्रृंखला का हिस्सा है। इसमें मांग, आपूर्ति, बिक्री, मुनाफा और कई बार संरक्षण तक की कड़ियां जुड़ी होती हैं। यदि इस पूरी श्रृंखला पर एक साथ प्रहार नहीं किया गया, तो केवल जागरूकता के सहारे नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना कठिन होगा।
सरकार और पुलिस की ओर से चलाए जा रहे अभियानों का उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना है। लेकिन उसी समाज में यदि नशे की उपलब्धता आसानी से बनी रहती है, तो अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से अवैध मादक पदार्थों की बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।यह भी जरूरी है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं तक सीमित न रहे। असली चुनौती उस नेटवर्क को तोड़ने की है, जो नशे को बाजार तक पहुंचाता है। यदि बड़े कारोबारी, तस्कर और अवैध नेटवर्क कानून की पकड़ से बाहर रहेंगे, तो छोटे स्तर पर की गई कार्रवाई स्थायी समाधान नहीं दे सकती।जागरूकता अभियान अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। समाज को यह भरोसा होना चाहिए कि नशे के खिलाफ कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।नशामुक्त समाज केवल पोस्टर लगा कर फोटो खींचने से नहीं बनेगा। इसके लिए जागरूकता, कानून का प्रभावी पालन, अवैध कारोबार पर कठोर कार्रवाई और युवाओं के लिए बेहतर विकल्प, रोजगार तथा स्वस्थ वातावरण, इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
आखिरकार, सवाल केवल इतना नहीं है कि ‘नशे से दूरी है जरूरी’ का संदेश कितने लोगों तक पहुंचा। असली सवाल यह है कि नशा बेचने वालों तक कानून की पहुंच कितनी मजबूत हुई।
क्योंकि नशे के खिलाफ वास्तविक सफलता उस दिन मानी जाएगी, जब अभियान की आवाज केवल दीवारों पर नहीं, बल्कि बाजार और समाज की वास्तविक तस्वीर में भी दिखाई देगी। वरना खतरा यही है कि नशामुक्ति का संदेश नारों में गूंजता रहे और नशे का कारोबार अपनी रफ्तार से चलता रहे।


