बुखारेस्ट, 24 जुलाई । रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में शुक्रवार को आयोजित एक समारोह में बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया।
समारोह में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी और रोमानिया के अन्य शैक्षणिक संस्थानों से संयुक्त शोध, शिक्षकों और छात्रों के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने कहा, “आज जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीकों और विज्ञान की तेजी से हो रही नई प्रगति के दौर से गुजर रही है, तब ऐसी यूनिवर्सिटियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ज्ञान के साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत भी जुड़ी रहे।”
उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की तरक्की का जरिया नहीं है, बल्कि एक न्यायपूर्ण और सभी को साथ लेकर चलने वाले समाज की सबसे मजबूत नींव है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें कुछ समय तक शिक्षक के रूप में काम करने का मौका मिला था। उस दौरान उन्होंने देखा कि एक साधारण सी कक्षा भी किसी परिवार का भविष्य बदल सकती है और धीरे-धीरे पूरे समाज पर उसका अच्छा असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी इसी सोच पर आधारित है। इसमें नवाचार, शोध, रचनात्मकता और दुनिया के दूसरे देशों के शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा दिया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “भारत और रोमानिया भले ही भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर हों, लेकिन हमारी सभ्यताएं लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं। कई बार यह जुड़ाव राजनयिक रिश्तों से पहले हमारे कवियों के माध्यम से दिखाई दिया। लगभग सदी पहले, नवंबर 1926 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर इसी शहर आए थे और बुखारेस्ट के नेशनल थिएटर में मानवता की एकता पर भाषण दिया था। वे इस बात से बहुत प्रभावित हुए थे कि यहां के लोग भारतीय सोच को कितनी गहराई से समझते हैं। रोमानिया के राष्ट्रीय कवि मिहाई एमिनेस्कु ने अपने छात्र जीवन में उपनिषदों और भगवद्गीता का अध्ययन किया था। इन शिक्षाओं का उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा।”
इससे पहले दिन में राष्ट्रपति मुर्मु ने बुखारेस्ट के विक्टोरिया पैलेस में रोमानिया के प्रधानमंत्री इली बोलोजान से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने कई अहम क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्तों को और मजुबूत बनाने पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, कनेक्टिविटी और नई उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत की।


