परिजनों का आरोप: एक नस ब्लॉक बताकर ऑपरेशन किया, बाद में दो ऑपरेशन की जानकारी दी; मरीज की हालत बिगड़ने पर दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा, 18 हजार रुपये खर्च कराने की भी शिकायत
जबलपुर। शहर के ग्लेक्सी हॉस्पिटल पर आयुष्मान कार्डधारी मरीज के इलाज में कथित लापरवाही बरतने और उसकी हालत बिगड़ने के बाद इलाज से इनकार करने का गंभीर आरोप लगा है। मरीज के परिजनों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को अस्पताल की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मरीज के परिवार के साथ पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी शाबान मंसूरी भी जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड से भुगतान लेने के साथ ही परिवार से अलग से करीब 18 हजार रुपये खर्च कराए, लेकिन मरीज की हालत बिगड़ने के बाद उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
ब्लड प्रेशर बढ़ने पर अस्पताल ले गए थे परिजन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शहपुरा तहसील के मगरमुंडा निवासी शेख मोहम्मद इकबाल की 26 जुलाई को अचानक तबीयत खराब हो गई थी। उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था। परिजन रात करीब आठ बजे उन्हें जांच के लिए उखरी रोड, बल्देवबाग स्थित ग्लेक्सी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि रात करीब नौ बजे जांच रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आया है और उसके हृदय की एक नस ब्लॉक है। डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की आवश्यकता बताई। परिवार ने अस्पताल को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया और डॉक्टरों की सलाह पर ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी।
एक नस ब्लॉक बताई, बाद में दो ऑपरेशन करने की जानकारी दी
परिजनों के अनुसार, 27 जुलाई को मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था। ऑपरेशन से पहले उन्हें केवल एक नस ब्लॉक होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन मरीज के बाहर आने के बाद अस्पताल की ओर से दो ऑपरेशन किए जाने की बात कही गई।
परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद मरीज के मुंह से काफी खून निकल रहा था। यह देखकर परिजनों ने डॉक्टरों के सामने आपत्ति जताई और पूछा कि जब केवल एक नस ब्लॉक थी तो दो ऑपरेशन क्यों किए गए और मरीज के मुंह से इतना अधिक खून क्यों निकल रहा है।
बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान मरीज को दोबारा हार्ट अटैक आया था। परिजनों ने इस दावे पर भी सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अगले दिन लकवे का आरोप, अस्पताल ने दूसरे स्थान पर ले जाने को कहा
परिवार का दावा है कि ऑपरेशन के अगले दिन मरीज को लकवा मार गया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से इलाज जारी रखने में असमर्थता जताते हुए मरीज को नागपुर अथवा किसी अन्य बड़े अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
मरीज की गंभीर स्थिति और इलाज अधूरा छोड़ दिए जाने की बात से परिवार के लोग परेशान हो गए। उनका कहना है कि जब मरीज की हालत अस्पताल में इलाज के दौरान बिगड़ी, तब उसे अचानक दूसरे शहर या अस्पताल ले जाना उनके लिए आसान नहीं था। इस घटनाक्रम के कारण पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक दबाव में आ गया।
आयुष्मान कार्ड के साथ अलग से 18 हजार रुपये लेने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के दौरान परिजनों से 15 हजार रुपये काउंटर पर जमा करवाए गए। इसके अलावा सीटी स्कैन के नाम पर तीन हजार रुपये खर्च कराए गए। इस प्रकार परिवार से कुल 18 हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
परिजनों का कहना है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उनसे अलग से पैसे जमा करवाए गए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि आयुष्मान कार्ड से भुगतान लेने के बाद मरीज को एम्बुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया जा रहा था।
सूचना मिलने पर अस्पताल पहुंचे पूर्व पार्षद
मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व पार्षद शाबान मंसूरी रात करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा प्रबंधन से चर्चा की। मंसूरी ने आरोप लगाया कि मरीज की जान के साथ खिलवाड़ किया गया और इलाज पूरा किए बिना ही परिवार पर मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया गया।
उन्होंने मामले की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी। शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी ने कथित रूप से अस्पताल प्रबंधन से फोन पर बातचीत की और मरीज के परिवार से खर्च करवाए गए 18 हजार रुपये वापस करने तथा इलाज जारी रखने की बात कही। हालांकि, शिकायत के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने मरीज का आगे इलाज करने में असमर्थता जता दी।
सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हुआ इलाज
इसके बाद शाबान मंसूरी ने मेडिकल कॉलेज के डॉ. अर्जुन शर्मा से संपर्क किया और मरीज की सभी जांच रिपोर्ट उन्हें भेजीं। रिपोर्ट देखने के बाद मरीज को भर्ती कराने की सलाह दी गई। इसके बाद मरीज को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया।
बताया गया है कि उपचार के बाद सात अगस्त को मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। फिलहाल उसका इलाज घर पर जारी है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मरीज के परिजन मोहम्मद मुस्ताक मंसूरी एवं परिवार के अन्य सदस्यों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने अस्पताल के उपचार, आयुष्मान कार्ड से कथित भुगतान, अलग से ली गई राशि और मरीज की हालत बिगड़ने की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पूरे मामले की जांच करवाने और जांच में दोष सामने आने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में लगाए गए सभी आरोप मरीज के परिजनों और प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। प्रेस विज्ञप्ति में ग्लेक्सी हॉस्पिटल प्रबंधन का पक्ष शामिल नहीं किया गया है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की दूसरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


