August 25, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर असत्य प्रचार और भ्रम छोड़ें राहुल गांधीः शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पुणे में शनिवार को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति पर दिए गए बयान को लेकर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नाराजगी जताई है। शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर असत्य प्रचार और भ्रम छोड़ें। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “पुणे के अपने गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा हिंदुओं के प्रमुख धर्मशास्त्र मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है। राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है।” शंकराचार्य ने कहा, “संरक्षण और दायित्व का विधान: जिस श्लोक पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने”, को राहुल गांधी ने अनुचित रूप से उद्धृत किया, वह स्त्री की परतन्त्रता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उसकी सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व का विधान है। संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से यहां ‘रक्षति’ (रक्षा करना) मूल धातु के अर्थ में सुरक्षा का विधान करती है, न कि किसी प्रकार के नियंत्रण ‘नियन्त्रयति’ की। सनातन परम्परा में नारी का स्थानः भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित नहीं, बल्कि ‘शक्ति’ और महानिर्मात्री माना गया है। ऋग्वेद की मन्त्रद्रष्टा ऋषिकाओं गार्गी, मैत्रेयी, लोपामुद्रा से लेकर यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः का उद्घोष करने वाली यह संस्कृति अधिकार-केन्द्रित संघर्ष के स्थान पर परस्पर पूरकता और सर्वोच्च आदर पर आधारित है।”
शंकराचार्य ने कहा, “राहुल गांधी को यह राजनीतिक भ्रम भी व्याप्त है कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है जबकि यह पूर्णतः निराधार और सत्य से परे है। स्वतंत्र भारत का शासन और किसी भी राजनीतिक व्यवस्था का संचालन केवल भारत के संविधान से होता है। अपने राजनीतिक नैरेटिव को गढ़ने के लिए किसी दल को जबरन मनुस्मृति से जोड़ना राहुल गांधी का एक और मनगढ़ंत असत्य है।”उन्होंने कहा, “राहुल गांधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि उनकी मानसिकता मूलतः हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के विरोध की है। संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों के विषय में बार-बार असत्य व भ्रामक प्रचार करने के कारण ही हमने पूर्व में उन्हें ‘हिन्दू धर्म से बहिष्कृत’ घोषित किया था। हम उन्हें चेतावनी देते हैं कि वे अपनी इस धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बाज आएं। यदि वे और उनकी कांग्रेस पार्टी बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और बोध के सनातन धर्मग्रन्थों पर इसी प्रकार भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे, तो देश का प्रबुद्ध और सनातनप्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा।”

 

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