September 1, 2026
सी टाइम्स
व्यापार

सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट



नई दिल्ली, 31 अगस्त  वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों की दिशा और कीमती धातुओं की मांग को लेकर जारी बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने सोने और चांदी को लेकर बेहद आशावादी अनुमान जताया है। मोनार्क पीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 5,000 डॉलर से 5,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 95 डॉलर से 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट ने इस सबसे सकारात्मक परिदृश्य या ‘बुल केस’ की संभावना 25 प्रतिशत बताई है। इसके अनुसार, यदि अमेरिकी श्रम बाजार में कमजोरी आती है, फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ती है और वास्तविक प्रतिफल (रियल यील्ड) में गिरावट शुरू होती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों द्वारा फिर से कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाना और चांदी की भौतिक आपूर्ति में तंगी लौटना भी इस तेजी के लिए जरूरी माना गया है।

हालांकि रिपोर्ट का सबसे संभावित परिदृश्य ‘बेस केस’ है, जिसे 55 प्रतिशत संभावना दी गई है। इस स्थिति में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 4,300 डॉलर से 4,700 डॉलर प्रति औंस और चांदी 70 डॉलर से 85 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर तक ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, ऊर्जा कीमतें सामान्य होंगी, वास्तविक प्रतिफल स्थिर रहेंगे और दुनिया के केंद्रीय बैंक प्रति तिमाही लगभग 250 टन सोने की खरीद जारी रखेंगे।

रिपोर्ट में एक ‘बेयर केस’ परिदृश्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसकी संभावना 20 प्रतिशत आंकी गई है। यदि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है तथा महंगाई में कमी मांग की कमजोरी में बदल जाती है, तो सोना 3,400 डॉलर से 3,900 डॉलर प्रति औंस और चांदी 45 डॉलर से 55 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ सकती है।

मोनार्क पीएमएस के मुताबिक, सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी मुद्रास्फीति-संरक्षित प्रतिभूतियों (टीआईपीएस) का वास्तविक प्रतिफल है, जो 2.41 प्रतिशत पर बना हुआ है। चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज या प्रतिफल नहीं देता, इसलिए ऊंचे वास्तविक प्रतिफल निवेशकों के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बन जाते हैं और सोने की मांग पर दबाव डाल सकते हैं।

वहीं चांदी के बुनियादी कारकों को रिपोर्ट ने काफी मजबूत बताया है, जिसके अनुसार, चांदी का बाजार लगातार छठे वर्ष घाटे की स्थिति में है। वर्ष 2021 से अब तक लगभग 762 मिलियन औंस चांदी सतही भंडार से निकल चुकी है, जबकि वैश्विक खनन उत्पादन पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे भविष्य में मांग बढ़ने पर कीमतों में तेज उछाल की संभावना बन सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि चांदी की मांग बढ़ती है तो सीमित भौतिक उपलब्धता कीमतों को और तेजी से ऊपर ले जा सकती है। कॉमेक्स बाजार में कागजी दावों की तुलना में उपलब्ध भौतिक चांदी का अनुपात अभी लगभग 5.6 गुना है, जो आपूर्ति संबंधी दबाव की संभावनाओं को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सोने-चांदी का अनुपात भी सामान्य हो गया है, जो जनवरी में 46 गुना से शिखर से बढ़कर आज लगभग 69 गुना हो गया है, जो इसके 21वीं सदी के औसत के करीब है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में चांदी ने अपनी पहले की बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया है और अब यह सोने की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती है।

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