जबलपुर। बलराम जयंती एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। विश्वविद्यालय के कैरियर एवं गाइडेंस प्रकोष्ठ में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। इस दौरान परिसर में ‘नंद के आनंद भयो’ और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा रक्षाबंधन, बलराम जयंती एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर जारी निर्देशों के पालन में आयोजित कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। विश्वविद्यालय परिवार ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के जीवन आदर्शों का स्मरण करते हुए धर्म, कर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कुलगुरु प्रो. वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कर्म, कर्तव्य, नीति, न्याय और संघर्ष के बीच सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी प्रासंगिक है। विद्यार्थियों को परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बलराम शक्ति, पराक्रम, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के प्रतीक हैं, वहीं श्रीकृष्ण ने बुद्धि, नीति और कर्म के माध्यम से जीवन में संतुलन का मार्ग दिखाया। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में विवि डीसीडीसी प्रो. राकेश बाजपेयी, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. अश्विनी जायसवाल सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विश्वविद्यालय की प्रगति, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा समाज में शांति, सद्भाव और समरसता की कामना की।


