तेहरान, 20 सितंबर )। अमेरिका के साथ करीब सात महीने से जारी युद्ध के बीच ईरान ने एक ओर बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी तैयारी भी स्पष्ट कर दी है। रविवार को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ये बातें कही।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा स्थिति में ईरान को “लड़ना भी है और बातचीत भी करनी है” और निर्णायक समय आने पर अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ दुश्मन को पीछे धकेलते हुए उसे “भयंकर झटके” देने होंगे।
संसदीय सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “जब युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हो जाए और दुश्मन कमजोर स्थिति में पहुंच जाए, तब कूटनीति के जरिए इन सैन्य उपलब्धियों को मजबूत किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “बातचीत को लेकर ईरान की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट, तार्किक और अपरिवर्तनीय है। अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किए जाने तक होर्मुज खुलने की संभावना नहीं है।” इससे पहले भी ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि जलडमरूमध्य को खोलने का फैसला अमेरिकी कदमों और तेहरान की शर्तों की पूर्ति से जुड़ा होगा।
ईरान का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिशें चल रही हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका के साथ किसी औपचारिक बातचीत की शुरुआत से पहले तेहरान ने सात शर्तें रखी हैं। इन सभी शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरान की प्रमुख मांगों में युद्ध समाप्त करना, फ्रीज ईरानी फंड को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना शामिल बताया गया है।
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने भी कहा है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर। उनके बयानों के अनुसार, ईरान को अमेरिकी हमले की आशंका बनी हुई है और उसने अपनी सैन्य योजनाओं को इसी संभावना को ध्यान में रखकर तैयार किया है। रेजाई ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका के साथ टकराव बढ़ता है तो ईरान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट विवाद का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और इसके आसपास जारी तनाव का असर तेल तथा गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। अगस्त में ईरान ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका द्वारा उसकी शर्तें स्वीकार किए जाने और अपना रुख बदलने तक जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा।


