भूरा माहू और तना छेदक कीट से फसल प्रभावित, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
जबलपुर। मौसम में बदलाव और तापमान बढ़ने से जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, डिंडौरी और विदिशा सहित धान उत्पादक क्षेत्रों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की जानकारी सामने आई है। कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिक खेतों का निरीक्षण कर किसानों को बचाव की सलाह दे रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में भूरा माहू सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। यह पौधों के निचले तने से रस चूसता है। प्रकोप बढ़ने पर खेत में गोलाकार सूखे पैच बनने लगते हैं। इसे हॉपर बर्न कहा जाता है। वहीं तना छेदक कीट पौधे के तने में प्रवेश कर उसे नुकसान पहुंचाता है, जिससे गोभ सूख जाती है और सफेद थोथी बालियां निकलती हैं।
धान में बालियां निकलने, दाना भरने और फसल पकने के दौरान कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ब्लास्ट रोग में पत्तियों पर गहरे धब्बे दिखाई देते हैं, जबकि शीथ ब्लाइट में तने और पत्ती के आवरण पर धब्बे बनने लगते हैं।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. अमित झा ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञों की सलाह लेने को कहा है। भूरा माहू मिलने पर पंजीकृत कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करें और छिड़काव के दौरान दवा पौधों के निचले हिस्से तक पहुंचाएं। खेत में अनावश्यक पानी न भरने दें तथा यूरिया का संतुलित उपयोग करें। रसायनों का छिड़काव साफ मौसम में सुरक्षात्मक उपकरण पहनकर ही करें।


