जबलपुर। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के बैनर तले जबलपुर में सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने एकत्रित होकर शासन की नीतियों के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल निरस्त करने, टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने और प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता गणना कर समस्त लाभ देने की आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।प्रांताध्यक्ष भरत पटेल, महासचिव गोविंद बिसेन, जिलाध्यक्ष शिवकुमार चौबे, संभागाध्यक्ष देवेंद्र राजपूत, गुलाब बड़गैया, आशीष उपाध्याय, दीनानाथ चौधरी, राकेश मिश्रा, केके साहू और चंद्रभान कौरव के नेतृत्व में शिक्षकों ने सामूहिक उपवास रखकर धरना दिया। इसके उपरांत एक विशाल रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया।
रजिस्टर प्रणाली बहाली और टीईटी परीक्षा निरस्त हो
धरने के दौरान शिक्षक नेताओं ने प्रशासनिक फरमानों पर गंभीर आपत्ति जताई। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि दूरदराज के ग्रामीण और नेटवर्क विहीन अंचलों में ई-अटेंडेंस व्यवस्था से शिक्षकों को भारी तकनीकी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके स्थान पर पूर्व की भांति उपस्थिति पंजिका यानी रजिस्टर से ही दैनिक हाजिरी मान्य की जाए। इसके साथ ही सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा की बाध्यता को पूरी तरह रद्द किया जाए, क्योंकि सालों से कार्यरत गुरुजनों पर यह नियम अनावश्यक मानसिक दबाव बना रहा है।
प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता लाभ प्रदान करें
ज्ञापन के जरिए पदाधिकारियों ने सेवाकाल से जुड़ी पुरानी मांगों को भी रेखांकित किया। उन्होंने मांग उठाई कि शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना संविदा अथवा गुरुजी के रूप में हुई प्रथम नियुक्ति की तिथि से की जाए। ऐसा होने पर ही प्रदेश के हजारों शिक्षक न्यायसंगत क्रमोन्नति, पदोन्नति, ग्रेच्युटी और अन्य समस्त सेवा लाभों के पात्र बन सकेंगे। शिक्षक प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर से इन लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में और उग्र रूप लेगा।


