जबलपुर। सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी या गलत जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का मामला हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है। जनहित याचिका में ऐसे मामलों में प्रमाण पत्रों की वैधता की जांच और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।
हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब राज्य सरकार के लिए संबंधित मामलों के रिकॉर्ड की जांच कर आगे की कार्रवाई करना महत्वपूर्ण हो गया है। न्यायालय के समक्ष बताए गए 47 मामलों के अलावा इसी तरह के अन्य मामलों में भी सरकारी स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
याचिका में सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए जारी जाति प्रमाण पत्रों की वैधता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे मामलों में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया, उपलब्ध दस्तावेजों तथा संबंधित न्यायिक आदेशों का परीक्षण किए जाने की जरूरत बताई गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को संबंधित विभागों से जानकारी जुटाकर मामलों का परीक्षण करना होगा। यदि जांच में प्रमाण पत्र नियमों के विपरीत पाए जाते हैं, तो संबंधित प्रकरणों में कानून और सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मामले में अब सरकारी कार्रवाई की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर 47 चिन्हित मामलों के साथ-साथ समान प्रकृति के अन्य प्रकरणों की स्थिति भी सामने आने की संभावना है। इससे सरकारी सेवाओं में आरक्षण के लिए जारी जाति प्रमाण पत्रों की जांच और उनकी वैधता का विषय आगे भी न्यायिक निगरानी में बना रहेगा।


