चुनाव जीतने पर निष्पक्ष, हारने पर वोट चोरी?
बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए गए आरोप राजनीतिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक गरिमा के प्रतिकूल हैं। यह कहते हुए वरिष्ठ समाजसेवी गणेश अग्रवाल ने कहा, राजनीतिक लाभ के लिए देश की स्वायत्त संस्थाओं की नींव हिलाने वाले राहुल गांधी के बेबुनियाद बयानों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी और उनकी पार्टी का यह रवैया गंभीर रूप से विरोधाभासी है। जब यही चुनाव आयोग चुनाव कराता है और कांग्रेस या उनके सहयोगी दल कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश या दिल्ली जैसे राज्यों में सरकार बनाते हैं, तब चुनाव प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी मान ली जाती है। परंतु, जब परिणाम विपरीत आते हैं, तो सीधे वोट चोरी और संवैधानिक तंत्र की नाकामी का राग अलापा जाने लगता है।
साजिश का नाम देना अनुचित
चुनाव आयोग में आयुक्तों द्वारा अलग-अलग विषयों या प्रक्रियाओं पर अपनी असहमति दर्ज कराना संस्था के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता का जीवंत उदाहरण है। गणेश अग्रवाल ने कहा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सरकारी गवाह बनने और इस्तीफे की दबाव बनाने जैसी मांगें सीधे तौर पर एक स्वतंत्र संवैधानिक पद की अवमानना कर रहे हैं नेता प्रति पक्ष राहुल गांधी।
जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना
गणेश अग्रवाल ने आगे कहा, भारत की चुनाव प्रक्रिया में केवल तीन आयुक्त ही शामिल नहीं होते, बल्कि देश के लाखों शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, सुरक्षा बल और बूथ स्तर के अधिकारी दिन-रात मेहनत करते हैं। वोट चोरी जैसे अनर्गल आरोप केवल आयोग के शीर्ष अधिकारियों पर हमला नहीं हैं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव कराने वाले उन लाखों भारतीय कर्मचारियों और अधिकारियों के निष्ठापूर्ण काम पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
जनादेश का अपमान
गणेश अग्रवाल ने कहा, भारत का मतदाता जागरूक है और हर चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग अपनी समझ के अनुसार करता है। मतदाता के फैसले को धांधली या चोरी बताना देश के करोड़ों नागरिकों की राजनीतिक समझ का अनादर है। यदि किसी प्रक्रिया में त्रुटि है, तो उसके लिए विधिक रास्ते खुले हैं, न कि मीडिया के सामने आरोप लगाकर भ्रम फैलाना।
जन-विश्वास कम करना
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सत्ता पाने या चुनाव हारने के डर से देश की रीढ़ माने जाने वाली चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करना अंततः राष्ट्र के हित में नहीं है। श्री अग्रवाल ने कहा, इससे आम जनता का अपनी ही लोकतांत्रिक प्रणाली से विश्वास उठता है। जो राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आरोपों और धमकियों के बजाय
राहुल गांधी को यह समझना होगा कि नेता प्रतिपक्ष का पद बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। गणेश अग्रवाल ने कहा, निराधार आरोपों, बयानों और धमकियों के बजाय उन्हें तथ्य और ठोस साक्ष्य संवैधानिक मंचों पर प्रस्तुत करने चाहिए। संस्थाओं पर सीधा प्रहार करने की राजनीति देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती है।


