23.5 C
Jabalpur
September 26, 2026
सी टाइम्स
बॉलीवुडमनोरंजन

पुण्यतिथि विशेष : सुरों के जादूगर हेमंत कुमार, जिनकी आवाज आज भी दिलों में गूंजती है

नई दिल्ली,  हिंदी और बंगाली सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी रेशमी आवाज से श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने वाले हेमंत कुमार मुखोपाध्याय सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि संगीतकार और फिल्म निर्माता भी थे। 26 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि है।  हेमंत कुमार का जन्म वाराणसी में हुआ था, जबकि उनके परिवार की जड़ें पश्चिम बंगाल के बहारू गांव से जुड़ी थी। बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में उनका परिवार कोलकाता आकर बस गया। हेमंत कुमार का बचपन और शिक्षा कोलकाता में ही हुई। इसी शहर में उनकी मुलाकात कवि और लेखक सुभाष मुखोपाध्याय से हुई, जो उनके करीबी मित्र बने।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद हेमंत कुमार ने जादवपुर विश्वविद्यालय में अभियांत्रिकी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन संगीत के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। कुछ समय तक उन्होंने साहित्य में भी हाथ आजमाया। उनकी कई लघुकथाएं उस दौर की प्रतिष्ठित बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। हालांकि, अंततः संगीत ही उनका जीवन और करियर बन गया।हेमंत कुमार ने 1933 में ऑल इंडिया रेडियो के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड कराया। बंगाली संगीतकार शैलेश दासगुप्ता से उन्हें काफी प्रेरणा मिली। 1980 के दशक में एक टेलीविजन साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि उन्होंने उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी, लेकिन उस्ताद के निधन के बाद यह प्रशिक्षण आगे जारी नहीं रह सका।

1937 में हेमंत कुमार ने कोलंबिया लेबल के लिए अपना पहला गैर-फिल्मी रिकॉर्ड जारी किया। इसमें संगीत शैलेश दासगुप्ता का था और गीत नरेश भट्टाचार्य ने लिखा था। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया के लिए गैर-फिल्मी गीत रिकॉर्ड किए। उनका पहला हिंदी रिकॉर्ड भी इसी कंपनी के लिए जारी हुआ, जिसमें ‘कितना दुख भुलाया तुमने’ और ‘ओ प्रीत निभाने वाली’ जैसे गीत शामिल थे।हेमंत कुमार रवींद्र संगीत के प्रमुख गायकों में भी गिने जाते हैं। 1944 में उन्होंने बांग्ला फिल्म ‘प्रिया बंधाबी’ के लिए पहली बार रवींद्र संगीत रिकॉर्ड किया। इसी वर्ष उन्होंने कोलंबिया लेबल के लिए गैर-फिल्मी रवींद्र संगीत भी रिकॉर्ड किया। उन्होंने 1947 में बांग्ला फिल्म ‘अभियात्री’ के लिए संगीत निर्देशन किया।

हिंदी सिनेमा में भी उनकी आवाज ने अमिट छाप छोड़ी। ‘है अपना दिल तो आवारा,’ ‘बेकरार करके हमें यूं न जाइए,’ ‘याद किया दिल ने’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ जैसे गीत उनकी पहचान का हिस्सा बने। उनके गायन में भावुकता, ठहराव और सहजता का अनूठा मेल था। यही वजह रही कि उनकी आवाज कई पीढ़ियों के श्रोताओं तक पहुंची। उनका निधन 26 सितंबर 1989 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुआ।

 

अन्य ख़बरें

रामलीला के मंच पर उतरेगा सितारों का कारवां, सीता बनेंगी मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 केजिया लिज़ मेजो

Newsdesk

इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक को सम्मान’, कौन होणार करोड़पति में पैठणी साड़ी पहनकर पहुंचीं माधुरी दीक्षित

Newsdesk

बेटी आलिया की फिल्म देख गदगद हुईं सोनी राजदान

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading