बालाघाट/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में 10 वीं शं. से 20 वीं
शं. के ऐतिहासिक पुरातात्विक महत्वपूर्ण अवशेषों को संरक्षित कर सुसज्जित तो किया है, वहीं छुक-छुक करती नैरोगेज इंजन-बोगी-गार्ड डिब्डा स्थापन के बाद धरोहर जंक्शन नामांकित कर विश्व का प्रथम संग्रहालय बन गया। इसे स्थायित्व करने के उद्देश्य से श्रीमती अनुभा मुंजारे विधायक ने विधायक निधि से टीन शेड निर्माण करवाकर अनोखी पहल की। इसी श्रृंखला में इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में विश्वकर्मा जयंती 17 सितम्बर 2026 को नया अध्याय प्रारंभ हुआ। जब श्री गणेश, हिन्दी दिवस तथा संस्थान का 43 वाँ स्थापना जो 14 सितम्बर से 27 सितम्बर विश्व पर्यटन दिवस पखवाड़ा के तहत अमूल्य धरोहर को दीपक शर्मा पुत्र ने, अपने पूज्यनीय पिताश्री स्व.देवदत्त शर्मा द्वारा संग्रहित की गई शेर ट्राफी को पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित, स्थायित्व हेतु श्रीयुत विजय वर्मा के समक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष को प्रदत्त किया। जिसे दिनांक 20 सितम्बर 26 नवमीं तिथि को पर्यटक हेतु सादगी पूर्वक प्रारंभ किया तो गया था, किन्तु अन्य कार्य पूर्णोपरांत विधिवत नवरात्रा पर्व की पंचमी तिथि दिनांक 15 अक्टूबर 2026, को डॉ.पं.भूपेन्द्र कुमार दुबे एवं पं.कपिल महाराज द्वारा मंत्रोच्चार से विधिवत पूजन अर्चन कर श्रीमती भारती सुरजीत सिंह ठाकुर अध्यक्ष नपा के मुख्य आतिथ्य, रमेश रंगलानी पूर्व अध्यक्ष नपा की अध्यक्षता, डॉ.कविता गहरवार संस्थानाध्यक्ष, डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने
लोकार्पित किया।
उक्त अवसर पर दीपक शर्मा और विजय वर्मा को शाल-श्रीफल, अभिनन्दन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
विचारों की क्रमबद्धानुसार अतिथियों ने इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट की निरंतर विकास की उपलब्धियों पर व्याख्यान प्रस्तुत कर रसास्वादन करवाया, भविष्य में पुरातत्व संग्रहालय को आकर्षित बनाने बखान किया।
उक्त अवसर पर डॉ.संतोष कुमार सक्सेना, प्रो.एम.एन.बापट, डाॅ.कुलदीप बिल्थरे, डॉ.सुभाष चंद्र गुप्ता, समीर सिंह गहरवार, राजेन्द्र कुमार ब्रम्हे, बाबूलाल गोमासे, कृष्णा कुमारी कंसरे, ममता भलावी, बलिनन्दर चौहान, रवि सहारे, दिनेश कुमार नेमा, सूरज पिछोड़े गणमान्य जनों आदि उपस्थित थे। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने किया। लोकार्पण कार्यक्रम अपरांह 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलता रहा।


