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October 17, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

‘रिजीम चेंज’ शब्द षड्यंत्र का प्रतीक, कांग्रेस-‘इंडी’ गठबंधन को जनसमर्थन नहीं: सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली,  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए कथित आंदोलन को फ्लॉप बताते हुए इसे विदेशी साजिश और ‘रिजीम चेंज’ की राजनीति करार दिया। सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, “कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन के दलों और विलुप्त होते हुए वामपंथी दलों के निरंतर समाप्त होते जनसमर्थन और निरंतर नैतिक पतन से जब उन्हें अब राजनीतिक दृष्टि से सफलता की कोई संभावना नहीं दिख रही है, तब हिंसक संघर्ष और षड्यंत्र के द्वारा विदेशी शक्तियों के साथ हाथ मिलाकर तख्तापलट किए जाने वाले ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का प्रयोग अब भारत की राजनीति में दिखाई पड़ रहा है।

इसके नए व्याकरणकर्ता आकर यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि नहीं, यह तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।” उन्होंने ‘गवर्मेंट चेंज’ और ‘रिजीम चेंज’ में अंतर समझाते हुए कहा, “हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं। चुनाव के द्वारा ‘गर्वेंमेंट चेंज’ शब्द होता है और जो ‘रिजीम चेंज’ शब्द होता है, वह षड्यंत्र और हिंसक संघर्ष के द्वारा तख्तापलट करने के प्रयास को होता है।” कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा, “कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन, वामपंथी दलों और कुछ अन्य संगठनों के द्वारा कनॉट प्लेस में जो तथाकथित विराट आंदोलन करने की घोषणा की गई थी, मुझे लगता है कि वहां चंद मुट्ठी भर लोग ही आए। चूंकि कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल को इंदिरा चौक कहते हैं और इनर सर्किल को राजीव चौक कहते हैं तो निश्चित रूप से स्वर्गीय इंदिरा और स्वर्गीय राजीव वहां से बैठकर उनका सिर शर्म से झुक गया होगा कि आज क्या स्थिति हो गई है कि आप चंद मुट्ठी भर लोग भी यहां एकत्र नहीं कर पाए।”

भाजपा सांसद ने युवाओं से अपील करते हुए कहा, “मैं देश के सभी युवाओं, किशोरों और नौजवानों से कहना चाहता हूं कि वे बहुत समझदारी से काम लें। सभी युवाओं से, चाहे वे इस आंदोलन में शामिल हों या बाहर से देख रहे हों, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि किसी और के खेल में मोहरा न बनें। ये बड़े स्तर की अंतरराष्ट्रीय साजिशें और मिलीभगत हैं।” त्रिवेदी ने कहा कि परीक्षा सुधार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, “एक उदाहरण देखिए कि परीक्षा सुधार जैसे मुद्दे पर, जो सच में सभी के दिल के करीब था, आपकी भावनाओं का फायदा उठाया गया। और चार महीने के भीतर ही पूरा ध्यान उस तरफ चला गया जो मेरे हिसाब से उनका असली मकसद था।” उन्होंने कनॉट प्लेस में भीड़ को लेकर भी सवाल उठाए।

त्रिवेदी ने कहा, “हालांकि, मैं यह कहूंगा कि जो प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में अपना प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें जरूर राहत मिली होगी। उनकी इस राहत को तीन शब्दों में समेटा जा सकता है: टीजीआईएफ — यानी थैंक्स गॉड्स इट्स फ्राइडे (‘शुक्र है कि आज शुक्रवार है।)'” उन्होंने कहा कि शुक्रवार की शाम और वीकेंड पर कनॉट प्लेस में स्वाभाविक रूप से भारी भीड़ होती है। “वीकेंड की शाम को, लगभग 6, 7 या 8 बजे कोई भी वहां जाकर देख सकता है कि इनर सर्कल में अक्सर काफी भीड़ होती है। इससे यह सवाल उठता है कि इस भीड़ को किस तरह पेश किया जा रहा है।” त्रिवेदी ने हिंदी कहावत का जिक्र करते हुए कहा, “हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए — जिसका मतलब है कि बहुत कम मेहनत में भी कोई चीज एक बड़ी उपलब्धि जैसी लग सकती है। अगर वहां सिर्फ 100 या 200 लोग भी इकट्ठा हों तो भी उस जगह पर पहले से मौजूद भारी भीड़ की वजह से यह जमावड़ा बहुत बड़ा लग सकता है।” अंत में उन्होंने गंभीर सवाल उठाया कि यह प्रदर्शन इसी खास समय पर और खासकर कनॉट प्लेस और सेंट्रल दिल्ली के इलाके में ही क्यों आयोजित किया गया।

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