ओएफ़के स्कूल का मामला, हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोपजबलपुर। जीसीएफ स्टेट स्थित ओएफके हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए करीब एक दर्जन हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने वन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और पूर्व अनुमति लिए बिना ही पेड़ों को कटवा दिया। काटे गए वृक्षों में बबूल और पलाश जैसी प्रजातियां शामिल होने की बात कही जा रही है। इस मामले ने पर्यावरण संरक्षण और संबंधित नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, आयुध निर्माणी बोर्ड के अधीन संचालित स्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए पेड़ों को हटाया गया। आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले वन विभाग से अनुमति लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि, पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों के पालन पर सवाल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा वृक्षों की अवैध कटाई को लेकर दिए गए निर्देशों के संदर्भ में भी इस मामले को गंभीर माना जा रहा है। नियमानुसार, संरक्षित प्रजातियों के वृक्षों की कटाई के लिए लागू प्रावधानों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता
शिक्षण संस्थानों के परिसरों में मौजूद पेड़ न केवल हरियाली बढ़ाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों और आसपास के लोगों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों को काटे जाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई जा रही है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वन विभाग इस मामले की जांच कर पेड़ों की कटाई से संबंधित अनुमति और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल करता है या नहीं। यदि बिना आवश्यक स्वीकृति के वृक्ष काटे जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठ सकती है।


